एक खत अपनी प्यारी बहना के नाम
प्रिय सुगंधा, आज तुम एक इंटरनेशनल इंवेट ( 12 वीं साउथ एशिया गेम) में इंडियन टीम का हिस्सा हो। अब तुम केवल बिहार एथलेटिक्स टीम का हिस्सा नहीं रह गई ह़ो बल्कि इंडियन एथलेटिक्स टीम की सदस्य बन गई हो। अब तुम्हारे ट्रैक सूट के पीछे सफेद अक्षरों में बिहार लिखा नहीं रहेगा। बल्कि अब नीले रंग के उस ट्रैक सूट पर बोल्ड अक्षर में INDIA लिखा होगा। जब इसे पहन कर तुम गांव में घुमोगी तो पापा का सीना गर्व से चौड़ा हो जाएगा। याद है तुम्हें एक दिन जब हम भाई-बहन सर्द की एक दुपहरी में पापा के साथ बैठकर कुछ बातें कर रहे थे तो पापा ने क्या कहा था। उन्होंने एक सपना देखा था कि ‘ सुगंधा नै जाने कहिया इंडिया के टीशर्ट पहनत ’ । मुझे तो पापा का यह सपना मुंगेरी लाल के हसीन सपने की तरह ही लगा था, जो है तो बहुत हसीन लेकन हकीकत कभी नहीं होगा। लेकिन उनके इस ख्वाब को बस चंद सालों में तुम हकीकत में बदल दोगी इसकी तो मैंने कभी कल्पना ही नहीं की थी। पर तुम्हारा यह सफर इतना आसान भी नहीं रहा। श्रीकृष्ण सिंह रामरुची कॉलेज के 350 मीटर परिधी वाले ग्राउंड से लेकर इस इंटरनेशनल गेम तक पहुंचने के सफर में तुमने न जान...