ईमी डायरी-3, कालीचरण भैया का मिलना
एक अंजाना सा शहर, बिलकुल नए चेहरे, एक नई भाषा (हिंग्लिश) और इन सब के बीच गुमनाम सा मैं। लाखों सपने, हजरों ख्वाब और न जानें कितनी ही उम्मीदें मन में लिए मैं अपनी जन्मभूमि से विदा लिया था। एक पल को ये ख्वाब बिखरने लगे थे, मन हिम्मत हारने लगा था, कुछ समझ नहीं आ रहा था। सिवाय इसके की कोई गलती तो नहीं कर दी अपनी भूमि को त्याग कर।न ऐसे ही ख्यालात में डूबा था। कि एक दिन अचानक मुलाकात हुई कालीचरण भैया से। एक ऐसे बड़े भाई, गार्जियन, दोस्त, या फिर राह दिखाने वाला कोई मार्गदर्शक। इसमें कोई भी शब्द मेरे लिए कालीचरण भैया को दिया जा सकता है। जिसने न सिर्फ मुझे इन अत्यंत ही छोटी और बेकार सी समस्याओं से निजात दिलाया, बल्कि कुछ बड़े, बहुत बड़े ख्वाब दिखाए। न सिर्फ ख्वाब बल्कि उसे पूरा करने का रास्ता भी बतलाया। इन रास्तों में आने वाली हर मुसिबतों से लड़ना सिखाया, जहां भी घबराया, हर लम्हा एक सहारे के रूप में सामने मिले। मेरे जीवन को ईमी से मिले बेहद बेस्किमती उपहार में से एक हैं “कालीचरण भैया”। कॉलेज का 10 वां या 15 वां दिन रहा होगा जब मेरा उनसे पहली दफा मिलना हुआ था। शायद किसी शिक्षक को अपना ...