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Showing posts from February, 2020

बाबा

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सात सौ दिनों से भी कम पुराने रिश्ते में जब कोई आपकी आवाज की मोटाई को फोन के उस पर से भी भाफ ले। आपकी आवाज का धीमापन उसे परेशान कर दे। आपके मुरझाए चेहरे की मुस्कुराहट लौटाने की खातिर वह अपना हर सुख त्यागने को तैयार रहे। दुख में कंधे से कंधा मिला कर खड़ा रहे। तब यह रिश्ता दोस्त, सहयोगी, मित्र और सहोदर की सीमा रेखा को लांघ जाता है। अंग्रेजीदां इसके लिए ब्रदर फ्रॉम अनदर मदर टाइप शब्द इस्तेमाल करते हैं। हम जैसे देहाती इस रिश्ते को प्यार से करेजा नाम देते हैं। रिश्तों के चयन में हमेशा बेवकूफ बनने वाला, धोखा खाने वाला, नासमझ सा मैं बाबा के साथ इतनी घनिष्ठता को कभी सोचा भी नहीं था। वह 2018 के नवंबर का महीना था।चैम्बर के काले और ग्रे छींटदार सोफे पर जब हमारी पहली मुलाकात हुई थी।तब बाबा की आवाज में एक थरथराहट थी। एक रोज मेरी कांपती आवाज को इसके हौसले रूपी जैक का सहारा मिलेगा कहां पता था। खबरों के लिए मारामारी वाली पत्रकारिता के इस दौर में हम दोनों ने एक ही बीट को कवर किया। अलग-अलग अखबार के लिए। उस बीट के हर इंसान ने दोनों को एकदूसरे का साया कहा, लेकिन कभी ऐसा नहीं हुआ कि एक ही कार्...

बाल विवाह के लिए बदनाम झारखंड का एक दर्द ढुकुआ भी है...

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रविवार की अलसायी सर्द सुबह हो। दो दिन के बाद खिड़की के बाहर गुनगुनी धूप दिख रही हो। दफ्तर की मॉर्निंग मीटिंग से छुट्टी हो। भला किस रिपोर्टर का कंबल  से निकलने का मन करे। ऐसे में असाइनमेंट पर जाना हो वो भी तब जब अपने बीट का न हो। अधमने मन से ही पहुंचा था रांची के दीनदयाल नगर स्थित आईएएस क्लब में। पहुंचते ही यहां कई चीजें हैरान कर देने वाली दिखी। एक साथ कई सवाल कौंध गए। 27 वर्ष की आयु में ऐसा पहली बार दिख रहा था कि एक ही पंडाल के नीचे पुरोहित सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सवार्थ साधिके शरण्येत्र्यंबके गौरी... पादरी बाइबल के वचन... और पाहन शादी के मंत्र पढ़ रहे थे। लगभग 100 से ज्यादा जोड़े अपने धर्म के हिसाब से विवाह की इस रीति को पूरा कर रहे थे। किसी से कुछ पूछता की नजर इस सामूहिक विवाह के पोस्टर पर ठहर गई।  ढुकुआ नहीं विवाहिता हूं, समाज की अस्मिता हूं। अभी ढुकुआ शब्द में उलझा ही था कि आयोजक मंडली के एक सदस्य को फोटोग्राफर से कहते सुना आइए आपको मसाला देता हूं। उनके पीछे मैं भी लग गया। वह एक मंडप जाकर रुके। इशारा किया। यहां मां-बेटी की शादी एक ही मंडप पर हो रही थी। कहानी यहीं न...