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Showing posts from 2016

ईमी डायरी-5 ...क्योंकि वह दिल्ली की लड़की थी

अब मेरे सामने दूसरा कोई रास्ता नहीं था शिवाय किसी का नाम बताने के. पांडे, शिवम और साथ बैठी सभी लड़कियां अपना हर अस्त्र का इस्तेमाल कर चुकी थी. अगर नहीं बताया तो हमारी मित्रता खत्म जैसी धमकियां मिलने लगी थी. अब अगर मित्रता और उन लोगों के इस जाल से निकलना है तो किसी न किसी लड़की का नाम बताना ही होगा मन ही मन मैंने सोचा. लेकिन एक सच्चाई यह भी थी कि जब मेरे दिल में किसी लड़की के प्रति ऐसा ख़याल था ही नहीं तो मैं किसका नाम बताउं. मेरे लिए यह सबसे बड़ा सवाल था. एक तरफ कुआं तो दूसरी ओर खाई वाली स्थिति थी. पापाजी मुझे पढ़ने के लिए दिल्ली भेजे थे. भैया जी एक काबिल इंसान बनाने के लिए यहां बुलाए थे. और मैं एक पत्रकार बनने के लिए यहां आया था. उस समय तक मेरे दिमाग में कुछ चलता था तो बस यही. घर से जब निकल रहा था तो पापा ने सैकड़ों हिदायतें और सलाह दिए थे और मैं एक आदर्श बेटे की तरह उनकी हिदायतों का पालन कर रहा था. कभी सोचा भी नहीं था कि मुझे ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ेगा.  वो भी इतनी जल्दी.. मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था कि मैं किसका नाम बताउं.  उनलोगों कि निगाहें मुझे ऐसे घूर रही थी जै...

बैक वाली लड़की

तब मैं दिल्ली में एग्जाम दे रहा था। एचआर का फोन आया शंभू जी आपके डॉक्युमेंट्स आपको मिल गए। नहीं सर। क्यों? सर अभी मैं एग्जाम देने दिल्ली आया हुआ हूं। ओके । सुनिए बोकारो पहुंचते ही बैंक वाला फॉर्म किसी आईडीबीआई शाखा में सब्मिट कर दीजिएगा। बेहतर होता कि आप इसे धनबाद के ही किसी ब्रांच में सब्मिट कराते। ओके सर। बोकारो आते ही मैंने नजदीकी आईडीबीआई बैंक शाखा का पता लगाया। शाम के लगभग चार बज रहे होंगे। रिपोर्टिंग का असाइनमेंट पूरा कर मैं बैंक पहुंचा।  गेट ओपन करते ही सामने वाले काउंटर पर ‘मे आई हेल्प यू’ का बोर्ड टंगा मिला। पीले रंग के टेबुल के पीछे हरे रंग की मूवेबल चेयर पर एक सांवली सी लड़की बैठी थी। उम्र यही कोई 23-24 वर्ष रही होगी। हैलो मैम। जी कहिए,  नजरें उपर करते हुए खनकदार बिहारी टोन में वह बोली... मैम मुझे ये ऑफिस से मिला है। मद्धिम आवाज में मैंने बताया..  अच्छा तो आप सैलरी अकाउंट ओपन करवाना चाह रहे हैं.. फॉर्म पर नजरें दौड़ाते हुए वह बोली...2रू. वाला एक पेन उसके होंठ के पास था...  बिहारी टोन के साथ हिंग्लिश काफी दिनों बाद सुना था। वो भी झारखंड में... जी म...

एक खत भैया जी के नाम

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आदरणीय भैया जी, आज आप पूरे 29 वर्ष के हो गए। मन में खयाल आया कि इस मौके पर क्यों न आपको एक खत लिख डालूं। फिलहाल मैं यही कर सकता हूं। लिखने के लिए सिस्टम के सामने बैठ तो गया। लेकिन यह तय नहीं कर पा रहा हूं  कि आपके ख़त की शुरुआत कहां से करूं। एक अजीब से उलझन में उलझ गया हूं। इसकी शुरुआत बचपन की उन खट्टी –मिट्ठी किन्तु प्यारी यादों से करूं जहां हम हर रोज झगड़ते थे पर कभी भी आपने हमें पापा-मम्मी से पिटने नहीं दिया। पापा से खुद तो कई दफा पिटे लेकिन कभी भी हमारी शिकायत उनसे नहीं की। हमारे हिस्से की मार भी कई मर्तबा आपने खुद खाई। पूरे घर वालों से छिपाकर हमलोग को वह पार्लेजी वाला बिस्किट का पैकेट और पीटर झा के दुकान वाला नमकीन याद है न आपको किस तरह आप हर शाम हमलोगों को दिया करते थे। हां आप बड़े थे तो थोड़ा ज्यादा जरूर खाते थे लेकिन शेयर करना कभी नहीं भूलते थे। या फिर इसकी शुरुआत उस समय से करूं जब हमारे बिखरते सपनों को आपने अपने बूते संवारा। जब हमारी खुशी के लिए आपने अपने हर ख्वाब को त्याग दिया। अपने छोटे भाई-बहनों को बेहतर शिक्षा देने के लिए आपने अपनी शिक्षा को बीच में रोक दी। भै...

तुम्हारे अहसास

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तुमसे बात कर अक्सर यह अहसास हुआ है, कि हर बात का एक मतलब होता है, उस अजीब से इमोजी का भी जो न बोल कर भी, कितना कुछ बयां कर जाता है... कुछ अलग है तुम में, तुम्हारे लहजे में, तुम्हारे अल्फाज में, क्योंकि, तुम्हारे एक दीदार से, मन हर्षित हो उठता है... तुमसे बात कर, अक्सर मुझे ऐसा महसूस हुआ है कि हर कठिन डगर आसां हो गया है दिशाएं पास आ गई हैं दुनिया सिमटकर एक आँगन सी बन गई है

दोस्त यह भी कोई उम्र थी जाने की

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दोस्त मोहन, नफरत और गुस्सों से भरी इस जालिम दुनिया ने तुम्हारा कत्ल कर दिया। तुम चले गए। सदा के लिए। कभी न लौट के आने के लिए। अब लालूकट हेयर स्टाइल वाला 6 फीट का वह गबरू जवान हमें गांव में कभी दिखाई नहीं देगा। न पोखर वाले बरगद के पेड़ के पास। न ठाकुरवाड़ी के मेन गेट पर लगने वाली मजलिस में। और न ही हाईस्कूल के ग्राउंड पर गेंद को सीमा रेखा के बाहर भेजते हुए। अब वह मुझसे नहीं पूछेगा कि ‘ का हो शंभू बाबू कहिया ऐन्हीं ’ वह मुझे नहीं कहेगा कि छोरा दिल्लिया जाके स्मार्ट हो गेलै हैं। दोस्त 26 अप्रैल की उस मनहूस सुबह गांव के व्हट्सअप ग्रुप पर तुम्हारा मृत चेहरा देखा तो अंदर से हिल गया। ‘ किसी ने मार दिया। ‘ अमित ने इसी लाइन के साथ तुम्हारी मृत तस्वीर को शेयर किया था। खुद पर यकीं नहीं हुआ यार आखिर यह कैसे हो सकता है ? अभी कुछ ही दिनों की तो बात है। जब हम मिले थे। होली में जम कर धमाल मचाए थे। तुम अपने छत पर फोन पर किसी से बतिया रहे थे कि अनंत के साथ हम तुम्हारे घर आ धमके थे। तुम्हारे पूरे चेहरे को दोनों मिलकर खेत वाली गोरकी मिट्टी से पोत दिए थे। चाची कहते रह गईं कि खाना खा लो। लेकि...

कुछ तो बात थी उसकी आवाज में

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शनिवार का दिन था और घड़ी की सुइयां रात के 9 बजने का इशारा कर रही थी। लैपटॉप के की - बोर्ड पर अपनी उंगलियों से मैं कुछ शरारत कर रहा था। कुछ लिखना चाह रहा था लेकिन बात नहीं बन पा रही थी। हलांकि जिस विषय पर लिखने की सोंच रहा था उस पर पूरे दिन अच्छा खासा रिसर्च किया था।  अचानक दिल में ख्याल आया चलो अपनी एक दोस्त से बात कर लेता हूं। शायद उससे बात करने के बाद कुछ बेहतर लिख सकूं। फोन उठाया और बेझिझक उसका नंबर मिला दिया। फोन के 10-12 बार रिंग के बाद उधर से एक प्यारी सी आवाज आई ‘ हैलो ’ । आवाज कुछ बदली-बदली सी लगी। मुझे लगा कहीं  मैं  गलत जगह तो फोन नहीं मिला दिया।  संदेह मिटाने के लिए मैंनें एक बार फिर कहा 'हैलो'। उधर से आवाज आई कौन बोल रहे हैं ? आवाज में इतनी मधुरता थी कि एक पल को मैं उसकी मिठास में खो गया। चंद सेकेंड बाद उससे तब बाहर आया जब उधर से आवाज आई 'हैलो'... मैंने कहा,  मैं भूत बोल रहा हूं। मुझे लगा कि वह मुझसे शरारात कर रही है। अच्छा तो भूत भी बोलते हैं। बिना किसी बिलंब के उधर से जवाब आया। कभी-कभी बोल लेते हैं। मैंने कहा। अब स्पष्ट हो गया थ...

एक खत केजरीवाल के नाम

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डियर केजरीवाल सर, एक बार फिर एक जूता आपकी ओर बड़ी आसानी से उछाल दिया गया। जैसा कि वीडियो में दिख रहा है वेद प्रकाश नाम का बिलकुल ही एक सामान्य सा लड़का बड़ी सहजता के साथ पहले तो आपकी बातों को सुन रहा था। न जाने अचानक उसे क्या हुआ कि उसने अपना जूता उतार कर आपकी तरफ उछाल दिया। हालांकि मंच पर आसीन आपके सहयोगीगण इस बार कुछ ज्यादा ही सतर्क थे। जूता आप तक पहुंचने से पहले उन्होंने इसे कैच कर लिया। लेकिन सर मेरे मन में काफी दिनों से एक सवाल कौंध रहा है कि आखिर आप में ऐसा क्या है कि सबसे ज्यादा जूते आपको ही पड़ते हैं। दूसरी तरफ दिल्ली की गलियों में लगे बैनर, पोस्टर और नेशनल न्यूज चैनल के साथ-साथ एफएम चैनलों पर दिखने वाले ऐड पर नजर दौड़ाएं तो ज्ञात होता है कि आप तो दिल्लीवासियों के हित के लिए बड़ी तेजी से काम कर रहे हैं। इसके बाद भी लोगों में आपके प्रति इतना गुस्सा क्यों है ? आप कह सकते हैं कि अन्य मुख्यमंत्रियों की तरह आप जेड प्लस सुक्योरिटी नहीं रखते हैं। इसलिए लोगों की पहुंच आसानी से आप तक हो जाती है। सर इस पर आपसे मेरा अगला सवाल यह होगा कि आपको ऐसा करने से किसने रोका है ? ...

नीतीश जी आप इसी तरह निश्चय करते रहिए

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नीतीश कुमार अपने कुछ अचानक फैसले से अक्सर लोगों को अचरज में डालते रहे हैं। चाहे वह लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी के साथ 17 साल पुरानी दोस्ती को अलविदा कहना हो या विधानसभा चुनाव से पहले धुरविरोधी लालू यादव के साथ गठबंधन का फैसला। दिलचस्प बात यह है कि अपने फैसले को सही साबित करना भी वह बखूबी जानते हैं। शराबबंदी का ऐसा ही एक फैसला दिसंबर 2015 में लेकर उन्होंने सभी को हैरान कर दिया था। चुनाव के दौरान एक आशा कार्यकर्ता को किए अपने वादे को पूरा करते हुए उन्होंने ऐलान किया कि वित्त वर्ष 2016 से बिहार में पूर्ण रूप से देसी शराब पर प्रतिबंध लगा दिया जाएगा। हालांकि दिसंबर में जब उन्होंने इस बात की घोषणा की थी तो सभी ने नीतीश कुमार का मजाक उड़ाया था। कोई भी यह मानने को तैयार नहीं था कि जिन्होंने बिहार में शराब की बिक्री को फर्श से अर्श पर पहुंचाया वही अब इस पर पाबंदी लगाने की बात कर रहे हैं। लेकिन अप्रैल की पहली तारीख से इन्होंने अपने वादे को पूरा करते हुए न केवल देसी पर बैन लगाया बल्कि चार दिन के भीतर ही विदेशी पर भी बैन लगा कर बिहार को पूर्ण रूप से एक ड्राई स्टेट घोषित कर...

एक खत अपनी प्यारी बहना के नाम

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प्रिय सुगंधा, आज तुम एक इंटरनेशनल इंवेट ( 12 वीं साउथ एशिया गेम) में इंडियन टीम का हिस्सा हो। अब तुम केवल बिहार एथलेटिक्स टीम का हिस्सा नहीं रह गई ह़ो बल्कि इंडियन एथलेटिक्स टीम की सदस्य बन गई हो। अब तुम्हारे ट्रैक सूट के पीछे सफेद अक्षरों में बिहार लिखा नहीं रहेगा। बल्कि अब नीले रंग के उस ट्रैक सूट पर बोल्ड अक्षर में INDIA लिखा होगा। जब इसे पहन कर तुम गांव में घुमोगी तो पापा का सीना गर्व से चौड़ा हो जाएगा। याद है तुम्हें एक दिन जब हम भाई-बहन सर्द की एक दुपहरी में पापा के साथ बैठकर कुछ बातें कर रहे थे तो पापा ने क्या कहा था। उन्होंने एक सपना देखा था कि ‘ सुगंधा नै जाने कहिया इंडिया के टीशर्ट पहनत ’ । मुझे तो पापा का यह सपना मुंगेरी लाल के हसीन सपने की तरह ही लगा था, जो है तो बहुत हसीन लेकन हकीकत कभी नहीं होगा। लेकिन उनके इस ख्वाब को बस चंद सालों में तुम हकीकत में बदल दोगी इसकी तो मैंने कभी कल्पना ही नहीं की थी।  पर तुम्हारा यह सफर इतना आसान भी नहीं रहा। श्रीकृष्ण सिंह रामरुची कॉलेज के 350 मीटर परिधी वाले ग्राउंड से लेकर इस इंटरनेशनल गेम तक पहुंचने के सफर में तुमने न जान...

ईमी डायरी 4, जब रोहित ने पूछा पसंदीदा लड़की का नाम

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तब  ईमी में मेरा लगभग चार से पांच महीना बीत गया था। कुछ अच्छे मित्र भी बन गए थे पहचान तो लगभग सभी से हो गई थी। दिसंबर की कोई तारीख रही होगी। हम कुछ मित्र लंच के बाद क्लास में बैठ कर आपस में कुछ बातें कर रहे थे। कि अचानक रोहित पांडे ने एक सवाल मेरे उपर पर दाग दिया। शंभू तुम क्लास में किस लड़की को पसंद करते हो। उस समय हमलोगों के साथ दो-तीन लड़कियां भी थी। अचानक यह सवाल सुनकर एक पल को तो मैं बिलकुल घबरा गया। सभी की निगाहें मुझे घूरने लगी। बताओ शंभू बताओ घबराओ नहीं मुझे परेशान देखकर रोहित ने बोला।हालाकि किसी दिल्ली वाले के लिए यह बेहद ही सामान्य सवाल था लेकिन मैं एक पल को पूरी तरह असहज हो गया था| किसी तरह हिम्मत जुटा कर बोल दिया कि सभी अच्छी लगती है। एक ठहाके के साथ अगला सवाल एक बार फिर दागा गया कि नहीं सबसे ज्यादा अच्छी कौन लगती है? रोहित उस दिन इंडायरेक्टली मुझसे यह जानना चाह रहा था कि हर किसी के दिल मे किसी का ख्याल रहता है तो आखिर मेरी आंखें क्लास के किस लड़की से चार होना चाह रही है। उसके जुवां से निकलने वाले हर लफ्ज मेरी परेशानी में इजाफा कर रही थी।  मुझे शर्माता देख रोहित ...

नीतीश के नेतृत्व में बिहार की आधी आबादी भर रही है उड़ान

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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की चाहे जितनी आलोचना कर लें कि वे सत्ता के भूखे हैं, लालची हैं, मौकापरस्त हैं। लालू के साथ मिलकर बिहार को एक बार फिर से जंगलराज में धकेल दिए हैं। कुर्सी की लालच में दो नौसिखिए को अहम मंत्रालय का जिम्मा सौंप दिए हैं आदि आदि। लेकिन इन सब से परे एक सच्चाई यह भी है कि नीतीश कुमार के शासनकाल में बिहार विकास का एक नया पैमाना गढ़ा है और इन आंकड़ों को झुठलाया नहीं जा सकता है। विकास के इन्हीं अहम कार्यों में से एक है राज्य की आधी आबादी को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाना। उन्हें एक नई पहचान देना। नीतीश कुमार पिछले एक दशक में महिलाओं को ध्यान में रख कर कई ऐसी योजनाएं लाए हैं जिसका लाभ राज्य की महिलाओं को मिल रहा है।  राज्य सरकार का हालिया निर्णय ‘राज्य के सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिए 35 फीसदी आरक्षण’ भी उसी में एक है। इससे न केवल राज्य में सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़ी महिलाओं को सशक्त होने में मदद मिलेगा बल्कि सरकारी दफ्तरों में महिलाओं की उपस्थिति भी बढ़ेगी। मौजूदा समय में राज्य के सरकारी दफतरों में महिला कर्मचारियों की उपस्थिति मात्र 9 फ...