ईमी डायरी-5 ...क्योंकि वह दिल्ली की लड़की थी
अब मेरे सामने दूसरा कोई रास्ता नहीं था शिवाय किसी का नाम बताने के. पांडे, शिवम और साथ बैठी सभी लड़कियां अपना हर अस्त्र का इस्तेमाल कर चुकी थी. अगर नहीं बताया तो हमारी मित्रता खत्म जैसी धमकियां मिलने लगी थी. अब अगर मित्रता और उन लोगों के इस जाल से निकलना है तो किसी न किसी लड़की का नाम बताना ही होगा मन ही मन मैंने सोचा. लेकिन एक सच्चाई यह भी थी कि जब मेरे दिल में किसी लड़की के प्रति ऐसा ख़याल था ही नहीं तो मैं किसका नाम बताउं. मेरे लिए यह सबसे बड़ा सवाल था. एक तरफ कुआं तो दूसरी ओर खाई वाली स्थिति थी. पापाजी मुझे पढ़ने के लिए दिल्ली भेजे थे. भैया जी एक काबिल इंसान बनाने के लिए यहां बुलाए थे. और मैं एक पत्रकार बनने के लिए यहां आया था. उस समय तक मेरे दिमाग में कुछ चलता था तो बस यही. घर से जब निकल रहा था तो पापा ने सैकड़ों हिदायतें और सलाह दिए थे और मैं एक आदर्श बेटे की तरह उनकी हिदायतों का पालन कर रहा था. कभी सोचा भी नहीं था कि मुझे ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ेगा. वो भी इतनी जल्दी.. मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था कि मैं किसका नाम बताउं. उनलोगों कि निगाहें मुझे ऐसे घूर रही थी जै...