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Showing posts from June, 2020

मुख्यमंत्री जी, मोरहाबादी की खूबसूरती पर यूं दाग न लगने दीजिए...

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माननीय मुख्यमंत्री, झारखंड, सर, जोहार। आपको ढ़ेर सारी बधाई। एक पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में राज्यसभा चुनाव में जीत की। बेटे के रूप में पिता के राज्यसभा पहुंचने के लिए। फादर्स डे से दो रोज पहले एक बेटा अपने पिता को इससे बेहतर उपहार और क्या दे सकता है। झारखंड के निर्माता गुरुजी एक बार फिर से ऊपरी सदन में झारखंडवासियों की आवाज बनेंगे। मैं जानता हूं मुबारकवाद रूपी संदेश और देने वालों का तांता लगा होगा आपके पास। बावजूद इसके हिम्मत किया हूं। आपके नाम का ये खत केवल मुबारकबाद देने भर के लिए नहीं लिख रहा। ये खत शहर के कोने से प्यार करने वाले प्रवासी की एक चिंता है। शनिवार की शाम इसी बागीचे में अपने मित्र के साथ थे।  दो साल सात महीने पहले बोकारो से रांची पहुंचा था। तब लालपुर और कोकर के अलावा इस शहर की किसी गली का नाम नहीं जानता था। दफ्तर के सीनियर ने एक-एक गली का मार्गदर्शन कराया। उन्होंने मुझे शहर के हर उस राह का पता बताया जहां से मुझे खबर मिल सकती थी। इससे इतर कुछ ठिकाने और कोने खुद तलाशा। ये कोना मेरे लिए सुकून था। सुख था।  एक अजनबी शहर में मेरे लिए उल्लास...

राज्यसभा चुनाव और चमकती दीवारों के बीच पावर सेंटर

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झारखंड में 19 जून को राज्यसभा की दो सीटों के लिए चुनाव होना है। चुनाव आयोग की तरफ से मैदान लगभग सज गए हैं। दो सीटों के लिए तीन खिलाड़ी अपनी किस्मत अजमा रहे हैं। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश, सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा के सुप्रीमो शिबू सोरेन और कांग्रेस के शहजादा अनवर। झारखंड में राज्यसभा चुनाव जितना सरल दिखता है उतना सामान्य बिलकुल नहीं होता। इस पर चर्चा से पहले चमकती दीवार की कहानी जान लीजिए। 16 जून को आजसू सुप्रीमो से उनके घर में मुलाकात करते मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन।  यह दीवार है ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (आजसू) सुप्रीमो सुदेश महतो के ड्राइंग रूम की। अगर आप मेरी तरह एक प्यारे से घर के शौकीन हैं तो ये दीवार आपको भी आकर्षित करेगी। कलाकारी की हुई इन दीवारों पर सीलिंग से पड़ती महंगी लाइट्स की मद्धम रोशनी और निखार देती हैं। दीवारों के बीच में दो खिड़कियां। ओह। इन सब के बीच सजा आलीशान सोफा। इस सुख की व्याख्या किसी घर के प्रेमी से पूछिए। एक सप्ताह में दो बार ये दीवारें अखबार के पन्नों पर जगह बनाने में कामयाब रही। दोनों बार राज्य में मौजूदा समय के पावर सेंटर वह...

ये शेखपुरा है मेरी जान

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बात पिछले साल छठ पूजा की है। गांव में युवाओं के कंधे पर एक खास रंग का गमछा जगह बना रहा था । पीले रंग का यह गमछा तेजी  से लोकप्रिय हो रहा था। इसकी लोकप्रियता यहां की राजनीति के रंग को एक नया कलेवर दे रहा था। इस रंग का चयन उनके नए - नवेले नेता आशुतोष ने किया था। रंग के साथ आशुतोष की आकांक्षाएं भी तेजी से फैलती गई और अब वह एक क्षेत्रीय पार्टी राष्ट्रीय जन जन नामक पार्टी के मुखिया हैं। ये हुई स्थानीयता की बात। शेखपुरा रेलवे स्टेशन।  अब जरा राष्ट्रीय रंग को यहां समझिए।  शेखपुरा जिले के भाजपा जिलााध्यक्ष दारो बिंद। इन दिनों खूब सूर्खियों बटोर रहे हैं। कारण है उनका उत्साह। वे इस बात से गदगद हैं कि अगड़ाबाहुल जिले में बाभन को चित्त कर वे जिलाध्यक्ष बने हैं। इस खुशी में वे खूब गरिया रहे हैं भूमिहार- बाभन को। उस जाति कि महिलाओं के किस्से भी लोगोंं को सुना रहे हैं। इन सबका एक ऑडियो भी फिजा में तैर रहा है (गुगल पर आसानी से उपलब्ध है)।  लगभग 60 फीसदी भूमिहार और ब्राह्ण व अन्य अगड़ी जाति वाले इस जिले में भाजाप जिलाध्यक्ष की इस अपार खुशी से भाजपा की तैयारी को भी समझ...