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Showing posts from 2021

JPSC सरकार की जागीर नहीं है

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' पहली बार झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षा में 75% से अधिक झारखंड के SC( अनुसूचित जाति) ST(अनुसूचित जनजाति) और अत्यंत पिछड़ा वर्ग(OBC) के छात्र शामिल हुए। इसलिए लोगों के पेट में दर्ज होना लाजिमी है।'  उक्त कथन झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का है। रांची में आयोजित झारखंड मुक्ति मोर्चा(JMM) के 12 वें केंद्रीय अधिवेशन में पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष चुने जाने के बाद उन्होंने 50 दिन से चल रहे JPSC के विवाद पर पहली बार अपने श्रीमुख से कुछ कहा है।  रांची के सर्कुलर रोड स्थिति JPSC का कार्यालय।  JPSC और विवाद का चोली-दामन का साथ रहा है। बिना विवाद के नियुक्ति हो जाए ये संभव ही नहीं है। इसी का नतीजा है कि अलग राज्य बनने के 21 साल के बाद भी अभी तक 10वीं JPSC परीक्षा का आयोजन संभव हो सका है। उसमें भी 7वीं से 10वीं 4 साल का एक साथ PT परीक्षा का आयोजन किया गया है। ताजा विवाद इसी परीक्षा पर है।  हम बात ताजा की ही करते हैं। पुरानी को खोदिएगा तो पीड़ा असह्य होगी। सरकार चाहे किसी पार्टी की रहे। राज्य की इस सबसे बड़ी प्रतियोगिता परीक्षा में सेटिंग के आरोप से बेदाग कोई नहीं रह...

मेरे गांव का कोई बच्चा अब 'नक्कट राम' से नहीं डरता है

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बिहार में पंचायत चुनाव चुनाव चल रहा है । गांव की सरकार के गठन की प्रक्रिया में एक बार फिर शराबबंदी चर्चा में है। बंदी की घोषणा के 5वें वर्ष में ही इसकी सफलता और असफलता पर सवालिया निशान है। सार्थकता पर हर किसी के पास एक कहनी है।  मुद्दा बड़ा है। इस पर खिड़कीनुमा स्क्रीन वाली लंबी बहस की जा सकती है। लेकिन, यहां मैं शराब और चुनाव के बीच अपने गांव में एक छोटे से बदलाव की जानकारी साझा करना चाहता हूं।नगर परिषद हो जाने के कारण मेरा गांव फिलहाल पंचायत चुनाव की गर्मी से दूर है। सो ऐसे भी वहां मुर्गा-भात और नाच-गाना फिलहाल नहीं चल रहा है। अब मेरे गांव का अब कोई बच्चा "नक्कट राम' (हालांकि अब ये नहीं रहे) से नहीं डरता है। इस नाम को यहां एक पात्र के रूप में रख लें। कहानी आगे है। नक्कट राम कोई डरावने इंसान नहीं थे। सुबह वे हर बच्चे को प्यार और पुचकार करते थे। उससे दोस्ती करते थे।  शाम ढ़लते ही घर से 100 मीटर दूर ही बच्चे को समझ आ जाता था कि नक्कट राम आ गए हैं, भागो। काम खत्म कर वे रोज एक तय मात्रा में शराब पीते थे। झूमते-हंकड़ते (चिल्लाते) हुए अपने घर तक जाते थे। बस उनकी यही  आवाज बच्चों क...

नालियों में टूटती सांसे और नींद में शहर की सरकार

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झारखंड की राजधानी में दो किस्म की सरकारें निवास करती हैं। एक राज्य भर की सरकार। दूसरी शहर की सरकार। अब जरा यहां जनप्रतिनिधियों की संख्या गिन लीजिए। वार्ड स्तर पर पार्षद, 53 वार्ड की नेता मेयर, इनसे थोड़े से नीचे विधायक, 7 विधायक के बराबर सांसद और 81 विधायक स्तर के सीएम तो राज्य भर की जनता के प्रतिनिधि हैं ही। घटना के बाद अक्सर घटना स्थल पर नेताओं की भीड़ जमा होती हैं। 15 घंटे बाद पंडरा में घर से दो किमी दूरी की यात्रा कर सांसद संजय सेठ और विधायक सीपी सिंह भी पहुंचे।  जिस शहर में इतने स्तर के जनप्रतिनिधि रहते हों। वहां की नालियों में हर वर्ष जानें कुहक-कुहक दफन होती हों। ऐसे शहर और इस शहर के मोहल्ला छाप (लेवल) अधिकारी को क्या कहेंगे आप। ये अधिकारी करोड़ो के फंड को डकारते हैं और नालियों के नाम पर बहा देते हैं। डकारना या बहा देना आप अपनी सुविधा के हिसाब से तय कर लीजिए। बाकी मेयर और नगर आयुक्त में इस बात की लड़ाई जारी है कि हम बेहतर की तुम बेहतर।  ये तस्वीर पिछले साल की है।जब कोकर के खोरहा टोली के खुले नाले में एक युवक सबके सामने बह गया था।   आंकड़ों पर आए उससे पहले घटना समझ ...

अदना ही सही ईमानदार रहिए

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I Will Take You In Court.. वो पूरी तरह परेशान थे। तब शायद वो ये समझने की अवस्था में भी नहीं रहे होंगे। क्या बोल रहे हैं? किसे बोल रहे हैं? उनके यह बोल भर देने  से क्या हो जाएगा?  उन्होंने सोचा होगा अदना सा ही तो है। डर जाएगा। अपनी दिशा को बदल लेगा। हर कोई डर जाता है कोर्ट के नाम से। लेकिन वह डिगा नहीं। उसके पास सवाल थे। वहा जवाब मांगता रहा। ऐसा पहली मर्तबा नहीं हुआ था। उनके सख्त लहजे से दिमाग में सहसा तीन साल पुराना किस्सा कुलांचे मारने लगा।  किस्सा सेल के शहर का है। साहब झारखंड लोक सेवा आयोग के अधिकारी थे। शहर की नली से लेकर गली और सड़क से लेकर पार्क को चकाचक रखने का जिम्मा उनके माथे था। एकछत्र राज था उनका। एकदम भौकाल टाइट टाइप। जिससे जो चाहे करा लेते थे। शहर के राजा के सचिव वाला जलवा था उनके पास। कोई उनकी बातों को उनके हिसाब से बस स्वीकार न करे। गजबे भड़कते थे। एक दिन पड़ गए उनके पाले में। जो मन में आया बोलते चले गए। जनाब यहां तक बोल दिए कि पास में होते तब कपार फोड़ देता। सामने वाला बस आहिस्ते से अपने सवाल पर उनका पक्ष लेकर हौले से थैंक यू बोला। मोबाइल के स्क्रीन पर लाल वाल...

लुगाई... कमाई.... जवानी और 35 बरस की जुदाई

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कहानी के असल मुद्दे पर आएं... उससे पहले भोजपुरी और अवधी में लोकप्रिय इस गीत की इस 4 पंक्ति का आनंद  लीजिए...  गोरिया नैहर में सपना सजावत रहे एक बरस एक दिनमां बितावत रहे जहिया गौना कें दिनवा बतवली सखी वही दिनवा से हरदी लगावत रहे आइल जाइय के लेले टिकसवा पिया गिरल बिजुली करेजवा पर फाटल हिया लोर भरके मनौती मनावत रहे रेलिया बैरन रेलिया बैरन पिया को लिए जाए रे... अंग्रेजीदां लोग से माफी के साथ। उनको इस गीत के भाव को समझने के लिए अपनी पेशानी पर ज्यादा जोर देना पड़ सकता है। अब आते हैं असल मुद्दे पर। 3 सितंबर की दोपहर। झारखंड के पंचम विधानसभा के मानसून सत्र का पहला दिन। इसकी गहमागहमी के बीच CM सचिवालय में आकर्षण का केंद्र 70 साल के एक बुजुर्ग थे। नाम-फुचा महली।   फुचा महली झारखंड के गुमला जिले के विशुनपुर प्रखंड के रहने वाले हैं।  चेहरे पर झुर्रियां...डबडबाइ आंखें और कमर से लाचार... । फुचा महली  सही से खड़े भी नहीं हो पा रहे थे। आवाज भी शब्द के साथ नहीं दे रहे थे। ये सिर्फ फुचा नहीं थे। प्रवासियों की मजबूरी की एक पूरी किताब थे। अगर 'प्रवासी' का मायना समझना चाहते हैं त...

नाम के आगे उपसर्ग लगातीं सरकारें और उस पर हाईकोर्ट की ये टिप्पणी

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भूख से मौत मामले की एक सुनवाई करते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने 2 सितंबर 2021 को एक सख्त टिप्पणी की है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस डॉ रविरंजन और जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की कोर्ट ने कहा-""झारखंड में आज भी यहां के लोगों को जंगली की तरह ट्रीट किया जाता है। बिरहोर समाज के लोग पत्ता खाने को मजबूर हैं। गैस चूल्हा, शौचालय और स्वच्छ पानी तक की भी कोई सुविधा नहीं मिल पा रही है। जबकि उनके ही जंगल से हम खनिज पदार्थ निकालते हैं। लेकिन उनका विकास नहीं हो पा रहा है।'' झारखंड हाईकोर्ट ने भूख से हुई मौत का स्वत: संज्ञान लिया है। अदलात ने कहा-"यह शर्म की बात है कि अभी भी कई गांव के लोग लकड़ी बेचकर अपना जीवन यापन कर रहे हैं। ऐसे में यह राज्य सरकार के लिए सोचने की जरूरत है कि योजनाएं धरातल पर पहुंचे। कोर्ट ने कहा कि क्या राज्य सरकार गांव में चिकित्सा सुविधा, स्कूल, शुद्ध पीने का पानी, रसोई गैस जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं उपलब्ध करा सकती है।'' आज से 5 साल पहले ऐसी ही एक स्टोरी की तालाश में मैं बोकारो के गोमिया, ललपनिया के गांवों में घूमा था। वह गांव पूरी तरह बिरहोर जनजाति का था। गांव...

नीतीश जी आप पूर्णिया के रंगदार को नहीं कोरोना योद्धा को गिरफ्तार कर लिए हैं

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दो दिन पहले की बात है। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की भाभी और जामा विधायक सीता सोरेन लाचारावस्था में पोस्ट लिखीं थी। वो पटना में एक जरूरतमंद लड़के की मदद करना चाहतीं थी। मदद के लिए हर दरवाजे से निराश उन्होंने पप्पू यादव का दरवाजा खटखटाया था। गुहार के चंद घंटे में ही उन्हें पप्पू यादव का रिप्लाई आया। मैडम उनकी जरूरत पूरी कर दी गई है। अगर आप जन अधिकार पार्टी (जाप) सुप्रीमो राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव के फेसबुक और ट्विटर की दीवार पर भटकिएगा तब पिछले एक महीने में इन्होंने क्या- क्या किया इसका पूरा हिसाब वहां मिल जाएगा। इन्होंने वो सारे काम किए हैं जो कोरोना महामारी के इस कठिन काल में इंसानियत के नाते एक इंसान को करना चाहिए। हां नेता के नाते इन्होंने सरकार की आलोचना भी की है। सही या गलत इसकी व्याख्या एक अलग चैप्टर में की जा सकती है।                                                                          ...