JPSC सरकार की जागीर नहीं है
' पहली बार झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षा में 75% से अधिक झारखंड के SC( अनुसूचित जाति) ST(अनुसूचित जनजाति) और अत्यंत पिछड़ा वर्ग(OBC) के छात्र शामिल हुए। इसलिए लोगों के पेट में दर्ज होना लाजिमी है।' उक्त कथन झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का है। रांची में आयोजित झारखंड मुक्ति मोर्चा(JMM) के 12 वें केंद्रीय अधिवेशन में पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष चुने जाने के बाद उन्होंने 50 दिन से चल रहे JPSC के विवाद पर पहली बार अपने श्रीमुख से कुछ कहा है। रांची के सर्कुलर रोड स्थिति JPSC का कार्यालय। JPSC और विवाद का चोली-दामन का साथ रहा है। बिना विवाद के नियुक्ति हो जाए ये संभव ही नहीं है। इसी का नतीजा है कि अलग राज्य बनने के 21 साल के बाद भी अभी तक 10वीं JPSC परीक्षा का आयोजन संभव हो सका है। उसमें भी 7वीं से 10वीं 4 साल का एक साथ PT परीक्षा का आयोजन किया गया है। ताजा विवाद इसी परीक्षा पर है। हम बात ताजा की ही करते हैं। पुरानी को खोदिएगा तो पीड़ा असह्य होगी। सरकार चाहे किसी पार्टी की रहे। राज्य की इस सबसे बड़ी प्रतियोगिता परीक्षा में सेटिंग के आरोप से बेदाग कोई नहीं रह...