नालियों में टूटती सांसे और नींद में शहर की सरकार
झारखंड की राजधानी में दो किस्म की सरकारें निवास करती हैं। एक राज्य भर की सरकार। दूसरी शहर की सरकार। अब जरा यहां जनप्रतिनिधियों की संख्या गिन लीजिए। वार्ड स्तर पर पार्षद, 53 वार्ड की नेता मेयर, इनसे थोड़े से नीचे विधायक, 7 विधायक के बराबर सांसद और 81 विधायक स्तर के सीएम तो राज्य भर की जनता के प्रतिनिधि हैं ही। घटना के बाद अक्सर घटना स्थल पर नेताओं की भीड़ जमा होती हैं। 15 घंटे बाद पंडरा में घर से दो किमी दूरी की यात्रा कर सांसद संजय सेठ और विधायक सीपी सिंह भी पहुंचे। जिस शहर में इतने स्तर के जनप्रतिनिधि रहते हों। वहां की नालियों में हर वर्ष जानें कुहक-कुहक दफन होती हों। ऐसे शहर और इस शहर के मोहल्ला छाप (लेवल) अधिकारी को क्या कहेंगे आप। ये अधिकारी करोड़ो के फंड को डकारते हैं और नालियों के नाम पर बहा देते हैं। डकारना या बहा देना आप अपनी सुविधा के हिसाब से तय कर लीजिए। बाकी मेयर और नगर आयुक्त में इस बात की लड़ाई जारी है कि हम बेहतर की तुम बेहतर। ये तस्वीर पिछले साल की है।जब कोकर के खोरहा टोली के खुले नाले में एक युवक सबके सामने बह गया था। आंकड़ों पर आए उससे पहले घटना समझ ...