29 दिसंबर की शाम तो नेता जीते थे पत्रकारिता 27 को ही जीत गई थी
दी रांची प्रेस क्लब के 2017 के कार्यकारिणी के चुनाव की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। यहां के 884 पत्रकारों ने अगले दो साल के लिए अपने खेवनहार को चुन लिया है। रांची के शुरुआती दिनों में मिलने वाला यह अनुभव मेरे लिए कई लिहाज से खास रहेगा।पूरे दिन सैकड़ों पत्रकारों का कतारबद्घ हो अपनी बारी का इंतजार करते देखना। जहां न कोई संपादक था, न न्यूज एडिटर, न रिपोर्टर और न कोई फोटो जर्नलिस्ट । यहां केवल मतदाता थे। झारखंड जहां पत्राकारिता को लोग पेशे से ज्यादा इज्जत से जोड़ते हैं उसकी राजधानी का यह नजारा अद्भुत था। इस चुनाव के परिणाम की घोषणा भले ही 29 दिसंबर को हुई हो लेकिन पत्रकारिता तो 27 को ही जीत गई थी। इनमें न कोई खास है न आम, सब एक हैं इस चुनाव के प्रचार को देखना कॉफी मग में शक्कर के क्यूब को घुलते देखना था। पत्रकार दफ्तर-दर-दफ्तर चक्कर लगा रहे थे। उनका दफ्तर आना, न जानते हुए भी लोगों से हाथ मिलाना, कई दफा गले भी लग जाना। आह ! कितना सुकूनदेह था इस दृश्य को देखना। इससे भी दिलचस्प था व्हट्स ग्रुप पर शब्दों के जादूगर...