लौट आये लालू
लौट आये लालू कभी देश की राजनीति में किंगमेकर के नाम से जाने जाने वाले लालू प्रसाद यादव की राजनीतिक नैय्या लगभग अपना किनारा तलाश चुकी थी। जब तक रहेगा समोशे में आलू तब तक रहेगा बिहार में लालू का जुमला गाने वाले लालू के बारे में कहा जाने लगा था कि अब उनकी लालटेन बुझ चुकी है। लेकिन एक बार फिर उनका सिक्का बिहार की राजनीति की राजनीति में चला और ऐसा जला की उनके लालटेन के लौ ने 2014 लोकसभा चुनाव से ही अश्वमेध के घोड़ा दौड़ा रही बीजेपी(इसमें मैं दिल्ली चुनाव को मैं शामिल नहीं कर रहा) को चारो खाने चित्त कर दिया । दिलचस्प यह रहा कि लालू के इस विजय रथ(80 सीट) में सारथी की भूमिका एक बार फिर उनके छोटे भाई नीतीश कुमार(71 सीट) ने निभाया। कभी जंगल राज की की दुहाई देकर बड़े भाई से मोह भंग कर लालू और राबड़ी के साम्राज्य को बीजेपी के साथ मिलकर नस्तोनाबूत करने वाले नीतीश एक बार फिर से जंगल राज के साम्रज्य के किले को खड़ा कर दिया(हालांकि उसकी मजबूती को लेकर सभी के जेहन में शक है) हालांकि नीतीश कुमार एक बार फिर से बिहार के सिरमौर बन जाएंगे लेकिन इस क्रम में किसी को सबसे ज्यादा क्षति पहुंची है तो वो श्रीम...