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Showing posts from 2018

दारोगा बहन की रिपोर्टर भाई से शिकायत

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रिपोर्टर शंभू नाथ से बात हो रही है... आपके खिलाफ कंप्लेन है... कंप्लेन यह है कि पिछले तीन दिन से आप अपनी मां से बात नहीं किए हो... बहन के वीडियो कॉल को भी इग्नोर करते हो आप...। फोन के उस पार की आवाज में खनक , रॉब , शिकायत अपनत्व वह सब था जो मुझे निरउत्तर कर गया। पत्रकारों के लिए बेफिक्री के दिन(विश्वकर्मा पूजा के दिन अखबार के दफ्तर पूरी तर बंद रहते हैं) सुबह का यह पहला कॉल शुरुआती मिनट में ही नींद के नशे से उबार गया। कुछ जवाब दे पाता उससे पहले ही उधर से मिसरी घुली आवाज में एक और सवाल दागा गया , कैसे हो ब्रो ठीक हूं बहन , नींद के नशे से उबरते हुए मैंने कहा। नई-नई दारोगा बनी बहन के पास अपने भाई की यह पहली शिकायत पहुंची थी। फटकार का कोई मौका भला कैसे गवा देती। बहन खुश थी। दो दिन पहले फाइनली उसके ज्वाइनिंग की सारी प्रक्रिया पूरी हुई थी। वह अपनी पहली नौकरी पटना एसएसपी मनु महराज के अधीन करेगी। दो वर्षों से जिस सपने को वह देखते आ रही थी। अब बारी उसे जीने की है। दारोगा सुंगाधा कुमारी छोटी सी ही जिंदगी में सुग्गी (सुगंधा को प्यार से हम यही कहते हैं) ने कई मुस...

रांची:अव्यवस्थित तरीके से बसा एक शहर जिसकी फिजा में प्यार पसरा है

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रांची यानी प्रकृति की गोद में अव्यवस्थित तरीके से बसा एक शहर। एक शहर जिसका मिजाज दिन की हर बेला में अपना रंग बदलता है। पहाड़ों, जंगलों, झरनों और उद्योगों(छोटे व मंझोले) के बीच विभिन्न संस्कृतियों, धर्मों और संप्रदायों का संगम स्थल। इसके अलावा भी इसे अलग-अलग शब्दों में परिभाषित किया जा सकता है। हर किसी की अपनी नजर है और अपनी समझ भी। मैंने रांची को कुछ ऐसे ही देखा है। टैगोर हिल से रांची शहर महीना अप्रैल का था और तारीख दूसरे सप्ताह की कोई एक होगी। वर्ष 2016 था। झारखंड स्वर्ण जयंती एक्सप्रेस लगभग 30 घंटे की यात्रा के बाद मुझे देश की राजधानी से इस शहर में लेकर आई थी। दिल में पीड़ा और मन में घबराहट, बेचैनी छटपटाहट थी। सपनों का शहर छूट रहा था। पास वो आ रहा था जिसकी ख्वाहिश कभी नहीं की गई थी। जिससे पीढ़ियों से नाता नहीं रहा है।   रांची शहर का दृश्य ...और मैंने शहर को ही महबूब मान लिया लालपुर का लोअर वर्धमान कंपाउड। यहां के कोयला विहार अपार्टमेंट का चौथा फ्लोर। रांची का यह पहला ठिकाना था।जैसे-जैसे दिन ढलता गया, मैं इस शहर की आगोश में खोता चला गया। उस रोज की सुबह सिहरन के साथ शुर...