उसे अपने बालों में गजरा पसंद नहीं था
रात के लगभग 10.15 बज रहे होंगें. हर रात की तरह बोकारो का नया मोड़ अभी भी बिलकुल जवान था. जब समूचा बोकारो अपनी एक नींद पूरी कर लेता है. तब भी इस्कापात नगरी का यह कोना पूरी तरह गुलजार रहता है. शायद इसीलिए सिटी सेंटर के बाद सबसे ज्ययादा भीड़ यहीं दिखती है. स्ट्रीट की पीली रोशनी, बिहार, झारखंड और बंगाल के अलग-अलग जगहों के लिए भागती बड़ी-बड़ी बसें और चाय पर चर्चा करते लोग. लगभग आधी रात तक यहां का यही नजारा होता है. उस रात भी लोग होटल के आगे बिछी चौकी पर अपनी-अपनी बातों में खोये हुए थे. अचानक सब की नजरें होटल के ठीक बगल की मालाकार दूकान पर थम जाती है. माहौल में फुसफुसाहट शुरू हो जाती है. सब के चेहरे पर एक मुस्कान थी कातिल या गुंडों वाली ये आप अपने हिसाब से तय करने के लिए आजाद हैं. सबकी निगाहें उस दूकान में खड़ी एक लड़की और दो लड़के की गतिविधियों को घूर रही थी. लड़की की उम्र यही कोई 22-23 वर्ष रही होगी. लगभग इसी उम्र के दोनों लड़के भी होंगे. ये दोनों जबरदस्ती लड़की के बालों में गजरा लगवा रहे थे. उसे लगाकर चमेली को सूंघने के बहाने कभी लड़की की गर्दन को चूम रहे थे तो कभी उसके बालों को...