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UP में BJP से अलग लड़ेगी JDU, निशांत संभालेंगे चुनाव की कमान

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JDU एक बार फिर उत्तर प्रदेश में BJP से अलग होकर चुनाव लड़ेगी। पार्टी ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। चुनाव से 6 महीने पहले पार्टी अपने संगठन को एक्टिव करने में जुट गई है। पहली बार किसी राज्य के विधानसभा के चुनाव की कमान नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार संभालेंगे।   यूपी चुनाव में JDU के चुनावी कैंपेन का आगाज बिहार के हेल्थ मिनिस्टर निशांत कुमार दुर्गा पूजा के तुरंत बाद 25 अक्टूबर को करेंगे। बनारस में उनकी एक मेगा रैली आयोजित की गई है। इसमें JDU के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा भी उनके साथ मौजूद रहेंगे। क्या JDU उत्तर प्रदेश में अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है? इस सवाल पर उत्तर प्रदेश JDU के प्रदेश अध्यक्ष अनूप सिंह पटेल ने बताया, 'हम चुनाव की तैयारी में जुट गए हैं। विधानसभा चुनाव को लेकर पार्टी ने संगठन विस्तार शुरू कर दिया है।’  मंडल, जिला और विधानसभा स्तर पर सम्मेलन कराने के साथ संभावित उम्मीदवारों के नाम भी जुटाए जा रहे हैं। अभी 40 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। अंतिम निर्णय कोर कमेटी की बैठक के बाद लिया जाएगा।  चुनाव को लेकर पार्टी की क्या प्ल...

जाति के नाम पर एकजुटता की सियासत कहाँ गई?

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  'नीरजबा .... है.. जब तक जिंदा रहेंगे उसका विरोध करेंगे... उसने हमारे घर में AK-47 रखवा कर हमको जेल भिजवाया है...' — अनंत सिंह, विधायक, मोकामा 'ई हमारा जमानत जब्त कराएगा जी... जमानत लिखने आता है इसको?... इसके गांव लदमा (ब्रह्मर्षि स्थान) में न 'नरमुंड सम्मेलन' करवाए थे जी... गाड़ी में और घर में क्रिमिनल लेकर घूमता है.. हमको इसके सपोर्ट की जरूरत है क्या?' — नीरज कुमार, MLC, पटना स्नातक चंद रोज पहले तक सवर्ण, खासकर भूमिहार समुदाय के लोग खुद को प्रताड़ित महसूस कर रहे थे। गांव से लेकर शहर के किसी भी चौराहे या चाय के ठीये पर बैठ जाइए, बस यही चर्चा का विषय था कि— 'सम्राट चौधरी/सरकार सवर्णों के लिए खतरा है।' हालांकि अब तक ऐसा कुछ स्पष्ट रूप से प्रतीत होता दिखाई नहीं दे रहा है। लेकिन चाय की दुकान पर जुटने वाले 'बकैतों' के पास इसके पक्ष में अपने मजबूत तर्क मौजूद हैं। NEET छात्र हत्याकांड से लेकर भरत तिवारी एनकाउंटर तक— सभी घटनाओं को सवर्णों को प्रताड़ित किए जाने के तथ्य के रूप में सरेआम पेश किया जा रहा है। अब उसमें एक भूमिहार अधिकारी को डीजीपी पद से जबर...

अचानक ये आक्रोश

25 अगस्त पटना के अटल पथ पर नाराज लोगों ने 2.5 घंटे तक तांडव किया राह चलती महिलाओं से छेड़छाड़ किया लोगों की गाड़ियां जला दी पुलिस पर हमले हुए मंत्रीजी किसी तरह जान बचाकर भागे 27 अगस्त को नालंदा के हिलसा में ग्रामीण विकास मंत्री पर हमला सड़क दुर्घटना में 9 लोगों की मौत के बाद मातमपुर्सी में गए थे ग्रामीणों ने कहा , थोड़ी देर रुक जाइए , नहीं रुके तो ग्रामीणों ने हमला कर दिया मंत्री जी सिक्योरिटी के बीच जान बचाकर भागे। 27 अगस्त को ही अब एक घटना पटना के गर्दनीबाग में ही घटी है। यहां 5 साल की एक बच्ची सुसाइड करने की कोशिश की है। स्कूल के एक बंद बाथरुम में आग लगाकर जान देने की कोशिश की। इसके बाद आसपास के सैकड़ों लोग स्कूल में जुटे और हंगामा करने लगे। ग्रामीणों ने पुलिस पर हमला किया , स्कूल में तोड़ - फोड़ की। जमकर उत्पात मचाया। अचानक से आक्रोश वाला मामला बिलकुल नया मालूम पड़ रहा है। घटनाएं पहले भी हो रहीं थीं , लेकिन इस तरह का आक्रोश बहुत ने...

राहुल की राह निहार रहा बरबीघा का कांग्रेस आश्रम

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लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव दोनों आज बरबीघा में थे। वोटर अधिकार यात्रा के कार्यक्रम के तहत दोनों को आज बरबीघा के ऐतिहासिक SKR कॉलेज ग्राउंड में रात बिताना था। ये बरबीघा का प्रखंड कांग्रेस मुख्यालय है। आज इसके सबसे बड़े नेता यहां आए हैं और ये पूरी तरह वीरान है। कभी जिले भरे के नेता यहां से रणनीति बनाया करते थे। ( फोटो साभार- अरुण साथी जी के वॉल से ) बरबीघा में कांग्रेस से जुड़े कार्यकर्ताओं के लिए इससे बड़ा दिन नहीं हो सकता। इस यात्रा का रुट तय करने वाले नेताओं को इस बात का शुकराना तो पहुंचना ही चाहिए।  उन्होंने बड़ी काबिलियत रुट को निर्धारित किया है।  बरबीघा में राहुल गांधी के रुकने से क्या होग?  जनता क्या कहती है, उसे जानने से पहले बरबीघा विधानसभा को कांग्रेस के नजरिए से समझिए-   बरबीघा का श्रीकृष्ण सिंह चौक अभी ट्रैफिक के लिहाज से लाइफ लाइन है। मेरी याद में यहां पहली बार राष्ट्रीय स्तर के नेताओं की सभा हुई। वो भी बीच  सड़क पर। जितनी देर तक सभा हुई ट्रैफिक को रोक दिया गया।  - आजादी के बाद 1952 में...

आषाढ़ में हेमंत का आना भगवा पार्टी के कार्तिक को खराब कर सकता है...

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हेमंत सोरेन जेल यात्रा से लौट आए हैं। रांची में एक बार फिर से नारा गूंजा... जेल का ताला टूट गया.. हमेंत सोरेन छूट गया। इस नारे की असली टीस कहीं सुनाई दे रही होगी तो वो हरमू रोड स्थित  श्याम प्रसाद मुखर्जी भवन है।  ये कत्तई नहीं कह रहा कि हेमंत सोरेन को जेल भेजने के पीछे बीजेपी की साजिश थी। लेकिन आज जो हाईकोर्ट ने टिप्पणी की है, इसका सीधा लाभ हेमंत सोरेन को सूबे में 4 महीने बाद होने वाले चुनाव में मिलेगा।   हाई कोर्ट ने सोरेन को जमानत मंजूर करने के बाद अपनी टिप्पणी में कहा है कि हेमंत सोरेन के मनी लॉन्ड्रिंग केस में शामिल होने के कोई ठोस सबूत नहीं मिले हैं।  वे प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA)एक्ट के तहत जमानत की शर्तों को पूरा करते हैं।   हेमंत सोरेन ने साफ संदेश दिया है कि उनका परिवार उनके साथ एकजुट है। जेल जाने का फायदा हेमंत सोरेन की पार्टी को लोकसभा चुनाव में मिला। पार्टी एक सीट से तीन सीट पर पहुंच गई। अब बाहर आने का फायदा विधानसभा चुनाव में मिलना तय है। हेमंत सोरेन के जेल में रहने के दौरान इनके राह की जितनी मुश्किलें थीं उसका समाधान पहले ही...

8 प्वाइंट में समझिए विशेष राज्य का A2Z

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पिछले दो लोकसभा चुनावों की तरह 2024 चुनाव से पहले बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग सिर उठाने लगा है। बिहार में जातीय गणना की रिपोर्ट जारी होने और इसके आधार पर आरक्षण का दायरा बढ़ाने के बाद अब सीएम नीतीश कुमार इस मुद्दे पर केंद्र की मोदी सरकार को घेरने की तैयारी में हैं। उन्होंने ऐलान किया है कि विशेष राज्य का दर्जा नहीं मिला तो राज्य भर में आंदोलन करेंगे।  ऐसे में सवाल है कि विशेष राज्य का दर्जा होता क्या है? इसके मिल जाने से क्या लाभ मिलेगा? क्या बिहार को ये दर्जा मिल पाना संभव है या ये बस एक चुनावी मुद्दा भर है। 8 पॉइंट में समझिए विशेष राज्य का दर्जा से जुड़े हर सवाल के जवाब... 1. विशेष राज्य का दर्जा क्या है और कैसे मिलता है ? बिहार लोक वित्त और नीति संस्था के एसोसिएट प्रोफेसर और अर्थशास्त्री सुधांशु कुमार बताते हैं कि संविधान में विशेष राज्य का दर्जा देने का प्रावधान नहीं है। इसकी शुरुआत 5वें केंद्रीय वित्त आयोग की अनुशंसा से हुई । इनमें वे राज्य थे, जो अन्य राज्यों की तुलना में भौगोलिक, सामाजिक और आर्थिक संसाधनों के लिहाज से पिछड़े थे। नेशनल डेवलपमेंट काउंसिल ने पहाड़, ...

भीम संसद या भीड़ तंत्र

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पटना के वेटनरी कॉलेज ग्राउंड में जेडीयू की तरफ से संविधान दिवस के दिन भीम संसद का आयोजन किया गया। कार्यक्रम ऐतिहासिक रहा। भीड़ अप्रत्याशित रूप से जुटी। वेटनरी कॉलेज में आज तक इस तरह की भीड़ जमा नहीं हुई थी। ये बात सीएम नीतीश कुमार भी मान लिए। कार्यक्रम को बेल डेकॉर किया गया था ये बात उस रास्ते से गुजरने वाला हर राहगीर के जुवां पर थी ।  ये इस कार्यक्रम के कर्ता-धर्ता मंत्री अशोक चौधरी की बड़ी कामयाबी रही। किसी कार्यक्रम को सफल बनाना खास कर जातीय रैली जैसे कार्यक्रम को, एक चुनौती तो होती है। वो भी तब जब इस कार्यक्रम से ठीक एक दिन पहले भाजपा को मुंह की खानी पड़ी थी। जब झलकारी बाई के कार्यक्रम में उनके आशातीत भीड़ नहीं जुट पाई थी। इसके लिए सीएम ने मंच से अशोक चौधरी की वाहवाही भी की।   ये वो बातें रही जो बाहर से दिखी या दिखाई गई। बकौल अशोक चौधरी इस भीड़ में केवल दलित  शामिल नहीं हुए थे। इसमें दलित का भला सोचने वाले ईबीसी, ओबसी और मुस्लिम समुदाय के लोग भी जुटे थे। इनसे बात करने के बाद ये मालूम हुआ कि वेटनरी कॉलेज ग्राउंड से लेकर एयरपोर्ट की सड़कों पर खचाखच भरी भीड़ में बड़ी आबादी स...