राजेश भैया अब कभी भी मेरी खबर डेस्क हेड के रूप में नहीं पढ़ेंगे
2 अप्रैल 2016 यही वह दिन था जब राजेश भैया से मेरी पहली बातचीत हुई थी। वे मुझे बोकारो लाना चाहते थे। जब बोकारो भास्कर में मेरी नौकरी पक्की हुई थी तो इन्होंने नीरज से कहा था देख लेना नीरज मेरी मूंछ नीची नहीं होनी चाहिए। 30 मई 2016 पहली दफा इनसे बोकारो दफ्तर में मिला। लगभाग पापा की उम्र के एक शख्स। क्या कह के पुकारूं भैया (क्योंकि IIMC से हैं) सर(क्योंकि मुझसे अनुभव में 28 साल बड़े हैं)। भैया क्या कहके पुकारुं आपको। जो दिल करे पुकारो यार. एक बिंदास इंसान। सज्जनता और सरलता ऐसी कि क्रोधित इंसान भी इन्हें देखकर ठंडा हो जाता है। गुस्सा क्या बला है इन्हें नहीं पता। 11 महीने को दौरान एक दो दफा छोड़ दूं तो कभी इन्हें गुस्से में नहीं देखा। काम की दीवानगी ऐसी कि इतने सीनियर पोस्ट पर आने के बाद भी दो-दो महीने बिना वीकऑफ के काम करते हैं। सिस्टम पर इनकी उंगलिया चलती नहीं दौड़ती है। पेज एडिट करने में कोई सानी नहीं। हिन्दी ऐसी की पेज पर लगी खबर के बीच से गलतियां ढूंढ निकालते हैं। ...