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Showing posts from August, 2017

औरत की ममता

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हर रोज की तरह 28 अगस्त की सुबह भी सुषमा दी दरवाजा नॉक कर कमरे में आई. 15*6 के इस गुलाबी रंग के दीवार वाले कमरे में सब कुछ वैसा ही था जैसा वह पिछले 13 महीनों से देखते आ रही थीं. फर्श पर रात के जूठे बर्तन,  दो पानी की बोतल और टेबल पर बेतरतीब तरीके से रखे पुराने अखबार, दो किताबें और चार कलम. दीदी झाड़ू लगा रही थी, जूते से बाहर के जो गर्दे कमरे में आ गए थे, खाने के वो रैपर जो बिखरे थे उसे साफ कर रहीं थी. अचानक उनकी निगाह हल्दी और चूने के उस प्लेट पर गई जिसका पेस्ट मैंने रात में बनाया तो था पर लगया नहीं था. दीदी परेशान निगाहों से मेरी तरफ देखी. उनकी नजर मेरे  दाए हाथ पर रुकी जो अपने आकार से कहीं मोटा था. घबराते हुए पूछी क्या हुआ शंभू भैया ? उनके सवाल में एक अपनापन था. उनके चेहरे पर एक खा़मोश सा डर था. बताने की इच्छा नहीं होने के बाद भी उनकी इस घबराहट और अपनपन के आगे झूठ नहीं बोल सका... बता दिया, एक्सिडेंट हो गया दीदी जिससे हाथ में थोड़ी चोट आई है... ये क्यों नही लगाए.?  हल्दी की ओर इशारा करते हुए उन्होंने पूछा... इससे कुछ होता है क्या? मुझे लगा कहीं और कुछ नया झमेला न...
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डियर सुगंधा, आज पुर्णिमा है. सावन की.  कुछ नया नहीं है. अलग भी नहीं. यह हमेशा से आते रहा है. अभी से 12 घंटे बाद चला भी जाएगा.  अंतर बस इतना है कि आज हर बहन अपने भाई के पास पहुंचने की कोशिश कर रही होंगी. अमूमन तो पहुंच भी गई होंगी. अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांध रही होंगी. वह जीवन के रंगों की तरह रंग-बिरंगी होंगी. अलग-अलग डिजाइन भी होंगे उनके. भाइ के ललाट पर रोड़ी का गोल या लंबा टीका भी लगाई होंगी. उनके ऊपर चावल के कुछ दाने भी चिपकाई होंगी. आखिर में स्टील या पीतल की थाली में कपूर के लौ या घी के दीपक से उनकी आरती भी उतारी होंगी. उस परम शक्ति से अपने भाई के लंबी उम्र, कुशक्तियों से रक्षा और बुरी नजर से बचाव की प्रार्थना भी की होंगी. भाई अपनी बहना की ललाट को प्यार से चूम रहे होंगे. कोई गोद में उठा रहे होंगे.कई तो अपनी बहन की राखी वाली सेल्फी सोशल मीडिया पर भी डाल रहे हैं. सुगंधा मैंने भी अपने व्हट्सएप के वॉलपेपर में अपनी और तुम्हारी साथ वाली तस्वीर लगाई है. वही वाली तस्वीर जब तुम दिल्ली खेलने आई थी और हम तुमसे मिलने तुम्हारे होटल आए थे. सावन के पुर्णिमा के आने की घट...