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Showing posts from August, 2020

लीक

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मार्च में अचानक ये औरत प्रकट होती है। अखबारों के पहले पन्ने पर करोड़ों का विज्ञापन देती हैं। फिर अचानक लापता हो जाती है। दो नाम छोड़ने के साथ एक ऐलान कर जाती है। नाम है पुष्पम प्रिया चौधरी और पलूरल्स। ऐलान कि ये भावी मुख्यमंत्री प्रत्यशी हैं। लोग एलईडी वाली लाइट लेकर इस महिला को तलाशने में जुट जाते हैं। देवी जी काले कपड़े में सोशल मीडिया पर अवतरित होती हैं। दो हैशटैग के साथ। #LetsOpenBihar और #30yearsoflockdown  अखबार का विज्ञापन अंग्रेजी में था। मैडम खुदे विदेशन लग रहीं थी। लोगों के मन में इनको लेकर भारी आशंका थी। मैथिली, भोजपुरी और मगही में बतिया के बता दी कि खांटी बिहारन हैं। तब बिहारी जीन ने इनके सारे खानदान पर शोध कर लिया। किसी पुराने नेता जी की बेटी हैं। ये बेटी भले किसी पुराने नेता जी की हों। इनकी राजनीति और सोच दोनों नई है। यकीन मानिए पिछले चार महीने में बिहार की जो तस्वीर इन्होंने सोशल मीडिया पर दिखाई हैं कोई बिड़ले इतिहासकार ही बिहार के बारे में इतना जानते होंगे। यूपीएससी या बीपीएससी की तैयारी करने वाला भी बिहार को इतना नहीं पढ़ा होगा। मेरी बात पर यकीन न हो तो इनके टाइमलाइन पर...

...अलगाव

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प्रेम में अलगाव का घाव जितना गहरा होता है उतना ही पीड़ादायी। इसके लिए हर हवा पूरबा होती है। बीतते दिन के साथ यह नासूर होता जाता है।पीडित इंसान उस जख्म का भी आदी हो जाता है। वह उससे उबरना तो चाहता है लेकिन साथ की यादें उसे रोज कुरेद देती हैं। आखिर में इंसान उस जख्म से ही प्यार करने लगता है। उसकी यादों की तरह उसकी पीड़ा भी अपनी सी लगने लगती है। बशर्ते प्रेम दैहिक, भौतिक और सांसारिक सुख से इतर वाला हो। विद्या वाली देवी सरस्वती जी की पूजा वाले दिन उनकी आंखें पहली दफा चार हुई थी। धागे पर पताका लगाते-लगाते कब वह उसके दिल पर अपना ठप्पा लगा गई थी लड़के को भी समझने में एक अरसा लगा था। ठप्पे का रंग रोज दर रोज गहरा होता गया। दिन, सप्ताह, महीने साल बीत गए तब उसे इसका भान हुआ था उसे प्यार हो गया है। झूठ तो उसकी फितरत ही नहीं थी। प्रेम में फरेब कहां करता। कई बंदिशों के बाद भी उसने स्वीकार लिया कि वह उसके हाथ से गूंथे आटे की रोटी जीवन भर खाना चाहता है। उसे दफ्तर तक छोड़ने की जिम्मेदारी भी उठाने के लिए वह तैयार हो गया था। और इस तरह दोनों के प्यार का सफर शुरू हो गया। लड़के के जन्मदिन के रोज वह अपनी...

यूपीएससी में 90वां रैंक लाने वाली अनुपमा सिंह से गपशप

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यूपीएससी की ओर से जारी परिणाम में अनुपमा सिंह को 90वां रैंक मिला है। बतियाने की मेरी सूची में ये चौथे स्थान पर थी। तीन से लगभग एक ही सी बातें निकल कर सामने आईं थी। फ्लां कोचिंग में पढ़ें, आईएएस ही बनना था, 10-12 घंटे पढ़ाई करते थे आदि-आदि। मैं भी अपनी ड्युटी ही कर रहा था। अनुपमा सिंह से भी कुछ इसी तरह के जवाब की उम्मीद थी। लेकिन इन्होंने इसके उलट चौंका दिया। कायल बहुत कम लोगों का होता हूं। इनका हो गया। लगभग 20 मिनट तक बतियाई। एकदम इत्मिनान से। मुझे जल्दी थी लेकिन इनको कोई जल्दी नहीं थी। अखबार में छपने की कोई लालसा भी नहींदिखी इनमें। मैंने पूछा कितनी मेहनत की थी ? जवाब में उन्होंने कहा, मेहनत तो करना ही होता है न। कोचिंग के नोट्स पढ़ी, मेरा ऑप्शनल विषय था। सो उसका नोट्स खुद बनााई। राज्यसभा टीवी के कार्यक्रम को पूरे साल तक फॉलो की।और हां एक अखबार भी रोज पढती थी। वही घिसा-पिटा एक सवाल इन पर भी आजमाया, शुरू से आईएएस ही बनना चाहती थीं? इन्होंने तुरंत नकार दिया। नहीं-नहीं मैं तो गायनेकोलॉजिस्ट हूं। एमबीबीएस की, एमएस की फिर सीनियर रेजिडेंसशिप भी कर ली थी। नौकरी भी कर रही थी। पता नहीं 2014 में...