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Showing posts from April, 2016

तुम्हारे अहसास

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तुमसे बात कर अक्सर यह अहसास हुआ है, कि हर बात का एक मतलब होता है, उस अजीब से इमोजी का भी जो न बोल कर भी, कितना कुछ बयां कर जाता है... कुछ अलग है तुम में, तुम्हारे लहजे में, तुम्हारे अल्फाज में, क्योंकि, तुम्हारे एक दीदार से, मन हर्षित हो उठता है... तुमसे बात कर, अक्सर मुझे ऐसा महसूस हुआ है कि हर कठिन डगर आसां हो गया है दिशाएं पास आ गई हैं दुनिया सिमटकर एक आँगन सी बन गई है

दोस्त यह भी कोई उम्र थी जाने की

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दोस्त मोहन, नफरत और गुस्सों से भरी इस जालिम दुनिया ने तुम्हारा कत्ल कर दिया। तुम चले गए। सदा के लिए। कभी न लौट के आने के लिए। अब लालूकट हेयर स्टाइल वाला 6 फीट का वह गबरू जवान हमें गांव में कभी दिखाई नहीं देगा। न पोखर वाले बरगद के पेड़ के पास। न ठाकुरवाड़ी के मेन गेट पर लगने वाली मजलिस में। और न ही हाईस्कूल के ग्राउंड पर गेंद को सीमा रेखा के बाहर भेजते हुए। अब वह मुझसे नहीं पूछेगा कि ‘ का हो शंभू बाबू कहिया ऐन्हीं ’ वह मुझे नहीं कहेगा कि छोरा दिल्लिया जाके स्मार्ट हो गेलै हैं। दोस्त 26 अप्रैल की उस मनहूस सुबह गांव के व्हट्सअप ग्रुप पर तुम्हारा मृत चेहरा देखा तो अंदर से हिल गया। ‘ किसी ने मार दिया। ‘ अमित ने इसी लाइन के साथ तुम्हारी मृत तस्वीर को शेयर किया था। खुद पर यकीं नहीं हुआ यार आखिर यह कैसे हो सकता है ? अभी कुछ ही दिनों की तो बात है। जब हम मिले थे। होली में जम कर धमाल मचाए थे। तुम अपने छत पर फोन पर किसी से बतिया रहे थे कि अनंत के साथ हम तुम्हारे घर आ धमके थे। तुम्हारे पूरे चेहरे को दोनों मिलकर खेत वाली गोरकी मिट्टी से पोत दिए थे। चाची कहते रह गईं कि खाना खा लो। लेकि...

कुछ तो बात थी उसकी आवाज में

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शनिवार का दिन था और घड़ी की सुइयां रात के 9 बजने का इशारा कर रही थी। लैपटॉप के की - बोर्ड पर अपनी उंगलियों से मैं कुछ शरारत कर रहा था। कुछ लिखना चाह रहा था लेकिन बात नहीं बन पा रही थी। हलांकि जिस विषय पर लिखने की सोंच रहा था उस पर पूरे दिन अच्छा खासा रिसर्च किया था।  अचानक दिल में ख्याल आया चलो अपनी एक दोस्त से बात कर लेता हूं। शायद उससे बात करने के बाद कुछ बेहतर लिख सकूं। फोन उठाया और बेझिझक उसका नंबर मिला दिया। फोन के 10-12 बार रिंग के बाद उधर से एक प्यारी सी आवाज आई ‘ हैलो ’ । आवाज कुछ बदली-बदली सी लगी। मुझे लगा कहीं  मैं  गलत जगह तो फोन नहीं मिला दिया।  संदेह मिटाने के लिए मैंनें एक बार फिर कहा 'हैलो'। उधर से आवाज आई कौन बोल रहे हैं ? आवाज में इतनी मधुरता थी कि एक पल को मैं उसकी मिठास में खो गया। चंद सेकेंड बाद उससे तब बाहर आया जब उधर से आवाज आई 'हैलो'... मैंने कहा,  मैं भूत बोल रहा हूं। मुझे लगा कि वह मुझसे शरारात कर रही है। अच्छा तो भूत भी बोलते हैं। बिना किसी बिलंब के उधर से जवाब आया। कभी-कभी बोल लेते हैं। मैंने कहा। अब स्पष्ट हो गया थ...

एक खत केजरीवाल के नाम

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डियर केजरीवाल सर, एक बार फिर एक जूता आपकी ओर बड़ी आसानी से उछाल दिया गया। जैसा कि वीडियो में दिख रहा है वेद प्रकाश नाम का बिलकुल ही एक सामान्य सा लड़का बड़ी सहजता के साथ पहले तो आपकी बातों को सुन रहा था। न जाने अचानक उसे क्या हुआ कि उसने अपना जूता उतार कर आपकी तरफ उछाल दिया। हालांकि मंच पर आसीन आपके सहयोगीगण इस बार कुछ ज्यादा ही सतर्क थे। जूता आप तक पहुंचने से पहले उन्होंने इसे कैच कर लिया। लेकिन सर मेरे मन में काफी दिनों से एक सवाल कौंध रहा है कि आखिर आप में ऐसा क्या है कि सबसे ज्यादा जूते आपको ही पड़ते हैं। दूसरी तरफ दिल्ली की गलियों में लगे बैनर, पोस्टर और नेशनल न्यूज चैनल के साथ-साथ एफएम चैनलों पर दिखने वाले ऐड पर नजर दौड़ाएं तो ज्ञात होता है कि आप तो दिल्लीवासियों के हित के लिए बड़ी तेजी से काम कर रहे हैं। इसके बाद भी लोगों में आपके प्रति इतना गुस्सा क्यों है ? आप कह सकते हैं कि अन्य मुख्यमंत्रियों की तरह आप जेड प्लस सुक्योरिटी नहीं रखते हैं। इसलिए लोगों की पहुंच आसानी से आप तक हो जाती है। सर इस पर आपसे मेरा अगला सवाल यह होगा कि आपको ऐसा करने से किसने रोका है ? ...

नीतीश जी आप इसी तरह निश्चय करते रहिए

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नीतीश कुमार अपने कुछ अचानक फैसले से अक्सर लोगों को अचरज में डालते रहे हैं। चाहे वह लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी के साथ 17 साल पुरानी दोस्ती को अलविदा कहना हो या विधानसभा चुनाव से पहले धुरविरोधी लालू यादव के साथ गठबंधन का फैसला। दिलचस्प बात यह है कि अपने फैसले को सही साबित करना भी वह बखूबी जानते हैं। शराबबंदी का ऐसा ही एक फैसला दिसंबर 2015 में लेकर उन्होंने सभी को हैरान कर दिया था। चुनाव के दौरान एक आशा कार्यकर्ता को किए अपने वादे को पूरा करते हुए उन्होंने ऐलान किया कि वित्त वर्ष 2016 से बिहार में पूर्ण रूप से देसी शराब पर प्रतिबंध लगा दिया जाएगा। हालांकि दिसंबर में जब उन्होंने इस बात की घोषणा की थी तो सभी ने नीतीश कुमार का मजाक उड़ाया था। कोई भी यह मानने को तैयार नहीं था कि जिन्होंने बिहार में शराब की बिक्री को फर्श से अर्श पर पहुंचाया वही अब इस पर पाबंदी लगाने की बात कर रहे हैं। लेकिन अप्रैल की पहली तारीख से इन्होंने अपने वादे को पूरा करते हुए न केवल देसी पर बैन लगाया बल्कि चार दिन के भीतर ही विदेशी पर भी बैन लगा कर बिहार को पूर्ण रूप से एक ड्राई स्टेट घोषित कर...