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Showing posts from January, 2022

ओमिक्रॉन है, हल्के में न लें

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झारखंड के हेल्थ मिनिस्टर बन्ना गुप्ता के मुताबिक राज्य में अभी तक कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन के एक भी मामले नहीं मिले है। मंत्री जी का तर्क जान लीजिए। एक महीने पहले जिस सैंपल को जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए उड़ीसा के लैब में भेजा गया था उसकी रिपोर्ट निगेटिव आई है। इसी आधार पर राज्य में पिछले 4 दिन से रोज हजार से ज्यादा मिलने वाले मरीज को वे डेल्टा वैरिएंट के मान रहे हैं।  झारखंड के हेल्थ मिनिस्टर बन्ना गुप्ता मंत्री हैं। क्या कीजिएगा। भूल जाते हैं कि अगर डेल्टा वैरिएंट के एक्टिव मरीजों की संख्या राज्य में 5 हजार से ज्यादा हो जाए तो हेल्थ  सिस्टम का क्या हश्र हो सकता है। वो चंद महीने पहले के वे सारे मंजर भूल गए जब डेल्टा ने पूरे स्वास्थ्य महकमा को उल्टा कर के रख दिया था। दरअसल उनके पास इस बात का जवाब ही नहीं है कि राज्य में डेल्टा है कि ओमिक्रॉन पसर रहा है। क्योंकि इनके पास इसे जांचने की मशीन ही नहीं है। इस बीच रांची के राज हॉस्पिटल के 6 डॉक्टरों की टीम ने एक रिपोर्ट तैयार की है। ये टीम 10 दिन में रांची के 250 कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज व उनकी स्थिति का गहन अध्ययन कर दावा की ...

विचार कीजिएगा सरकार!

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ये एक्सपेक्टेड था कि तेजी से पांव पसारते कोरोना का प्रकोप शिक्षण संस्थानों पर ही सबसे पहले पड़ेगा। राज्य आपदा प्रबंधन समिति की बैठक के बाद स्वास्थ्य मंत्री जी ने पूरी स्पष्टता के साथ इसकी जानकारी भी दे दी। इसके तुरंत बाद हैरानी भरे तीन कॉल मुझे आए। यार कल से कोचिंग को बंद करना पड़ेगा। ट्रेनिंग सेंटर बंद हो जाएंगे।  सवाल केवल स्कूल, कोचिंग और ट्रेनिंग सेंटर भर के बंद हो जाने के नहीं है। मुद्दा है लाखों बच्चों का शिक्षा से दूर हो जाने का। दैनिक भास्कर में सोमवार को गिरिडीह के रिपोर्टर अजय तिवारी और प्रवीण राय की रिपोर्ट के मुताबिक झारखंड के 16 जिलों के 95% गरीब बच्चे ऑनलाइन क्लास से वंचित हैं। राज्य आपदा प्रबंधन समिति की बैठक के बाद जानकारी देते हेल्थ मिनिस्टर बन्ना गुप्ता। 80% की याददाश्त कमजोर हुई है। अब इनको पढ़ाने के लिए खेत-खलिहान में स्कूल चलाया जा रहा है। रांची के एक शिक्षक तो बच्चों को पढ़ाने के लिए अपनी कार को ही मोबाइल स्कूल बना दिए हैं।  माननीय मुख्यमंत्री जी बस चंद रोज पहले अपनी एक स्पीच में यह बात स्वीकार कर चुके हैं कि विकास की दौड़ में झारखंड के दिव्यांग हो जाने का सबस...

शुक्र है! CM ने झारखंड के पिछड़ने का कारण ढूंढ लिया

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अधिकारियों के साथ बैठक करते सीएम। CM हेमंत सोरेन विधानसभा में शाीतकालीन सत्र के आखिरी दिन बतौर सदन नेता अपनी बातें रख रहे थे। अपने वक्तव्य के शुरुआती 10 मिनट में ही उन्होंने कहा कि झारखंड एक अलग राज्य है। यहां की फिजा अलग है। यहां देश का 42% खनिज है। खनिज संपदा से परिपूर्ण राज्य होने के बाद भी यह राज्य पिछड़ा क्यों हैं ? इसका कारण उन्होंने ढूंढ लिया है? भरपूर चिंतन के बाद वे इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि अशिक्षा इस राज्य के पिछड़ने का सबसे बड़ा कारण है।लेकिन अपने लगभग 58 मिनट के भाषण मंें मात्र 3 जह उन्होंने शिक्षा का जिक्र किया। वो भी अपनी पीठ थपथपाने या विरोधियों की आलोचना करने के लिए।  पत्रकार दीर्घा में बैठे लोगों के लिए  CM का यह भाषण काफी महत्वपूर्ण था, क्योंिक प्रिंट के लिए जहां ये कल की लीड तय कर रहे थे तो डिजिटल के लिए साइन ऑफ के रूप में बड़ी खबर मिलने वाली थी। जब इन्होंने शिक्षा को गरीबी और पिछड़ापन का बड़ा कारण बताया तो मेरी उम्मीद बढ़ गई थी कि CM आज कुछ गंभीर बातों की ओर बढ़ रहे हैं। लेकिन नतीजा निराशाजनक रहा। CM  राज्य में बिना वाइस चांस्लर के चल रहे राज्य की 5 से ज्य...