गुरू बिन ज्ञान कहां रे
गुरूर्ब्रह्मा गुरूर्विष्णु:गुरूदेवो महेश्वर: गुरू: साक्षात्परब्रह्मा तस्मै श्री गुरूवेनम: गुरू एक ऐसा शब्द जिसे सुनते हैं शीष सम्मान से झुक जाता है, एक ऐसा प्रकाशपूंज जो जीवन के अंधकारमय गलियों में अपने प्रकाश से प्रकाशित कर दे, गुरू एक ऐसा शब्द जो जीवन की अज्ञनता रूपी झोली को अपने ज्ञान रूपी धन से भर देते हैं, गुरू जो हमें सन्नमार्ग पर चलने की राह दिखाते हैं, गुरू जो हमें जीवन जीने का गुर सिखाते हैं, ऐसी न जाने कई कला हैं जो हम गुरू से सीखते हैं। गुरू के बिना इस जीवन की कल्पना कोरी है। ...