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Showing posts from July, 2015

गुरू बिन ज्ञान कहां रे

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                                       गुरूर्ब्रह्मा गुरूर्विष्णु:गुरूदेवो महेश्वर:                                        गुरू: साक्षात्परब्रह्मा तस्मै श्री गुरूवेनम: गुरू एक ऐसा शब्द जिसे सुनते हैं शीष सम्मान से झुक जाता है, एक ऐसा प्रकाशपूंज जो जीवन के अंधकारमय गलियों में अपने प्रकाश से प्रकाशित कर दे,  गुरू एक ऐसा शब्द जो जीवन की अज्ञनता रूपी झोली को अपने ज्ञान रूपी धन से भर देते हैं, गुरू जो हमें सन्नमार्ग पर चलने की राह दिखाते हैं, गुरू जो हमें जीवन जीने का गुर सिखाते हैं, ऐसी न जाने कई कला हैं जो हम गुरू से सीखते हैं। गुरू के बिना इस जीवन की कल्पना कोरी है।        ...

आखिर तुम्हे जाना था...

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अल्लाह के प्यारे याकूब आखिर तुम्हें जाना है ये तो टाडा कि अदालत ने ही मुकर्र कर दिया था। लेकिन गर तुम यूं ही चले जाते जैसे कसाब गया तो उनका खाना कहां हजम हो पाता जिन्हें मुर्दों पर भी अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने की फितरत है, यह तमाशा कहां लगता जो कल की पूरी रात लगी, ये वैचारिक गालियां कहां पढ़ने को मिलता जो पिछले एक सप्ताह से तुम्हारे तथाकथित कुछ समर्थकों ने शोशल मीडिया पर फैला रखी थी, और हमारे गृह मंत्री की मानें तो भारत का सुप्रीम कोर्ट विश्व का पहला सुप्रीम कोर्ट कैसे बनता किसी की मर्शी पिटीशन पर रात के दो बजे सुनवाई करने वाला। ये बात दीगर है कि तुमने यह मान लिया था कि अब तुम्हें जाने से कोई नहीं रोक सकता।     लेकिन जरा सोचो तुम बच भी जाते तो क्या चैन से सो पाते, क्या वे आत्माएं तुम्हें सुकून से जीने देती जिसकी असामयिक और पीड़ादायक मौत तुम्हारी वजह से हुई, क्या तुम चाह कर भी उस मां के आंचल में खुशियां वापस ला पाते जिसकी गोद तुमने सूनी कर दी, क्या उस औरत का सुहाग लौटा पाते जिसे तुमने उजाड़ दिए थे, क्या उस बूढ़े बाप का सहारा लौटा पाते जिसके बुढ़ापे की लाठी तुमने छीन ल...