शुक्र है! CM ने झारखंड के पिछड़ने का कारण ढूंढ लिया
| अधिकारियों के साथ बैठक करते सीएम। |
CM हेमंत सोरेन विधानसभा में शाीतकालीन सत्र के आखिरी दिन बतौर सदन नेता अपनी बातें रख रहे थे। अपने वक्तव्य के शुरुआती 10 मिनट में ही उन्होंने कहा कि झारखंड एक अलग राज्य है। यहां की फिजा अलग है। यहां देश का 42% खनिज है। खनिज संपदा से परिपूर्ण राज्य होने के बाद भी यह राज्य पिछड़ा क्यों हैं ? इसका कारण उन्होंने ढूंढ लिया है?
भरपूर चिंतन के बाद वे इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि अशिक्षा इस राज्य के पिछड़ने का सबसे बड़ा कारण है।लेकिन अपने लगभग 58 मिनट के भाषण मंें मात्र 3 जह उन्होंने शिक्षा का जिक्र किया। वो भी अपनी पीठ थपथपाने या विरोधियों की आलोचना करने के लिए।
पत्रकार दीर्घा में बैठे लोगों के लिए CM का यह भाषण काफी महत्वपूर्ण था, क्योंिक प्रिंट के लिए जहां ये कल की लीड तय कर रहे थे तो डिजिटल के लिए साइन ऑफ के रूप में बड़ी खबर मिलने वाली थी। जब इन्होंने शिक्षा को गरीबी और पिछड़ापन का बड़ा कारण बताया तो मेरी उम्मीद बढ़ गई थी कि CM आज कुछ गंभीर बातों की ओर बढ़ रहे हैं।
लेकिन नतीजा निराशाजनक रहा। CM राज्य में बिना वाइस चांस्लर के चल रहे राज्य की 5 से ज्यादा यूनिवर्सिटी के बारे में एक लाइन नहीं बोले। बिना प्रिंसिपल के चल रहे राज्य के हजारों प्राथमिक और मध्य विद्यालयो ंकी स्थिति को सुधारने की दिशा में एक लाइन नहीं कहा। सुदूर ग्रामीण इलाकों में एक शिक्षक के भरोसे चल रहे स्कूलों के समस्या के समाधान के बारे में उन्होंने कुछ नहीं कहा।
राज्य में हर 5वीं, 8वीं और 10वीं के बाद शिक्षा से दूर (ड्रॉप आउट) होने वाले बच्चों को शिक्षा से जोड़े रखने के लिए इन्होंेने एक लाइन भी बोलना मुनासिब नहीं समझा। राज्य के टेक्निकल यूनिवर्सिटी में शिक्षकों की घनघोर कमी की समस्याओं को दूर करने के समाधान पर इन्होंने कुछ नहीं कहा। नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी जिसके वीसी फंड के लिए सरकार के पास गुहार लगा रहे हैं, उसके समाधान के लिए इन्होंने एक लाइन नहीं कहा।
हेमंत सोरेन एक अच्छे वक्ता हो गए हैं। साल दर साल वाक् कला में वे परिपक्व जरूर हो रहे हैं। उनके भाषण लिखने वाले शख्स राजनीति के चतुर खिलाड़ी मालूम पड़ते हैं। डिजिटल दौर की राजनीति में ये जरूरी भी है। खैर इन सब के बीच शुक्र है CM ने राज्य के पिछड़ने का कारण ढूंढ़ लिया।
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