दारोगा बहन की रिपोर्टर भाई से शिकायत

रिपोर्टर शंभू नाथ से बात हो रही है...
आपके खिलाफ कंप्लेन है...
कंप्लेन यह है कि पिछले तीन दिन से आप अपनी मां से बात नहीं किए हो... बहन के वीडियो कॉल को भी इग्नोर करते हो आप...।

फोन के उस पार की आवाज में खनक, रॉब, शिकायत अपनत्व वह सब था जो मुझे निरउत्तर कर गया। पत्रकारों के लिए बेफिक्री के दिन(विश्वकर्मा पूजा के दिन अखबार के दफ्तर पूरी तर बंद रहते हैं) सुबह का यह पहला कॉल शुरुआती मिनट में ही नींद के नशे से उबार गया। कुछ जवाब दे पाता उससे पहले ही उधर से मिसरी घुली आवाज में एक और सवाल दागा गया,
कैसे हो ब्रो
ठीक हूं बहन, नींद के नशे से उबरते हुए मैंने कहा।

नई-नई दारोगा बनी बहन के पास अपने भाई की यह पहली शिकायत पहुंची थी। फटकार का कोई मौका भला कैसे गवा देती। बहन खुश थी। दो दिन पहले फाइनली उसके ज्वाइनिंग की सारी प्रक्रिया पूरी हुई थी। वह अपनी पहली नौकरी पटना एसएसपी मनु महराज के अधीन करेगी। दो वर्षों से जिस सपने को वह देखते आ रही थी। अब बारी उसे जीने की है।


दारोगा सुंगाधा कुमारी

छोटी सी ही जिंदगी में सुग्गी (सुगंधा को प्यार से हम यही कहते हैं) ने कई मुसीबतों का सामना किया है। मुश्किलें चाहे कितनी बड़ी क्यों न हो अपने जिद्द से उस पर जीत दर्ज करते आई है। टूटे पैरों में भी वह ट्रैक पर फिनिशिंग प्वाइंट को छूकर ही गिरी है। गिर कर संभलना और संभलकर फिर से दौड़ना उसने 12 वर्ष की उम्र में ही सीख लिया था। 

पिछले दो वर्षों का संघर्ष उसके लिए अब तक की सबसे बड़ी चुनौती थी। वह हर रोज टूट रही थी। पर उसने खुद को कभी बिखरने नहीं दिया। यह उसकी लड़ाई थी। खुद लड़ी और सफल हुई। प्रतियोगिता जीतना तो उसकी आदत है। पहली दफा इसने उस चक्रव्यूह को भेदा है जो उसके उन्मुक्त उड़ान को पिंजड़े में कैद करने का प्रयास कर रहे थे। इस जीत की हकदार वह खुद है।

भैया जी की लाडली
                                   
पापा की दुलारी बेटी और भैया की लाडली बहन एक बार फिर से उन्हें गौरवान्वित की है। पापा की बेटी अब खाली इंटरनेशनल प्लेयर ही नहीं रही अब सरकारी मुलाजिम भी बन गई है।
ढेर सारी शुभकामनाएं बहना।
और हां लव यू सिस...।



Comments

Popular posts from this blog

मुख्यमंत्री जी, मोरहाबादी की खूबसूरती पर यूं दाग न लगने दीजिए...

रुचि

गुरविंदर कौर