झारखंड में कराहता विपक्ष
रांची की चाय दुकानों पर इन दिनों दो मुद्दों पर चर्चा गरम है। पहला शहर में चुनाव आचार संहिता लागू करने की और दूसरा विपक्ष में बीजेपी को वाक ओवर देने की आपाधापी। लोगों में इस बात पर दाव लगाया जा रहा कि राज्य में आचार संहित छठ बाद लागू होया या मुख्यमंत्री की जोहार जन आशीर्वाद यात्रा की समाप्ति के बाद। हर किसी के पास अपने-अपने तर्क हैं। इन सबके बीच आम जनमानस के मन में डर की एक महीन लकीर भी है। अगर ऐसा हो गया तब वैसा होगा और ये लौट आए तब वो कर देंगे। ये हो गई चाय पर चर्चा वाली बात।
अब आइए मुद्दे पर लौटते हैं। बात बीते रविवार की है। दोपहर एक बजे सीपीएआई(एम) की प्रेसवार्ता थी। मेन रोड स्थित पार्टी कार्यालय में। इसे पार्टी की वरिष्ठ नेता वृंदा करात संबोधित करने वाली थी। 1.15 बजे तक चार पत्रकार पहुंचे थे। दो रिपोर्टर, दो कैमरा पर्सन। दोनों एक ही संस्थान से निकलने वाले हिन्दी और अंग्रेजी अखबार के थे। वर्षों पुराने मकान में बने उस दफ्तर में सन्नाटा कुछ यूं पसरा था कि वहां कि एक पालतू बिल्ली कि आवाज भी कानों में चुभ रही थी।
20 मिनट के अंतराल में पार्टी के चार लोग उस कमरे में झांक कर जा चुके थे, जहां ये प्रेस वार्ता होनी थी। आखिर में 1.30 बजे पत्रकार भी इंतजार से ऊब गए। कहा, वृंदा जी को बुलाइए या हमलोग निकलते हैं। 35 मिनट की देरी से मैम आईं। अपनी बात रखीं। उनकी 90 फीसदी बातों में केंद्र सरकार की आलोचना थी। विधानसभा चुनाव या बिखरते विपक्ष के के हर सवाल को उन्होंने एक बुजुर्ग साथी की तरफ इशारा कर टालते गईं। आखिर में निवेदन भरे लहजे में उन्होंने कहा कि जो डेटा मैं दी हूं वही छाप दो तो बहुत है।
दूसरा दृश्य बुधवार का है। जगह हरमू स्थित भारतीय जनता पार्टी का प्रदेश कांर्यालय। कार्यालय के बाहर मेले सा नाजारा है। आलम यह है कि हरमू गोल चक्कर से लेकर अरगोड़ा चौक (लगभग एक किलोमीटर) तक गाड़ियां रेंग रहीं थी । इसे नियंत्रित करने में लगे दर्जन भर ट्रैफिक पुलिस के जवानो के पसीने छूट रहे थे। सड़क के दोनों किनारे जहां जगह खाली दिख जाए या आसपास के सभी मैदान में गाड़ियोंं से भरी थी। इन गाड़ियों में हरे रंग का एक पोस्टर चिपका है। जिनमें बोल्ड अक्षर में लिखा है मिलन समारोह।
दफ्तर के अंदर पार्टी बदलो अभियान चल रहा था। यहां कांग्रेस के विधायक सुखदेव भगत, मनोज यादव, झारखंड मुक्ति मोर्चा के विधायक कुणाल षाडंगी, जय प्रकाश पटेल, राज्य के पूर्व डीजीपी डीके पांडेय, एक अन्य पार्टी के भानू प्रतप शाही व सुचित्रा सिन्हा भगवा अंगवस्त्र धारण कर रहे थे। कल तक ये हरे अंगोछे वाले नेता हुआ करते थे। आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर इसे अब तक का यह सबसे बड़ा उलटफेर माना जा रहा है। उपर उद्धृत चारो विधायकों को विधानसभा में विपक्ष का सबसे मुखर और काबिल विधायक कहा जाता है, जिन्हें बीजेपी अपने पाले में लाने सफल हो गई।
अब जरा विपक्ष की कराहती स्थिति का एक नमूना देखिए। चुनावी बेला में राज्य की राजधानी के व्यस्ततम चौक में एक जेवर व्यापारी को गोली मार दी जाती है। भरी दोपहरी में। घटना को अंजाम देकर अपराधी आसानी से शहर से बाहर निकल जाते हैं। विरोध में व्यापारी सड़क पर हैं। विपक्ष इस पूरे नजारे से नदारद हैं। विपक्ष के लिए यह कोई मुद्दा नहीं है। न ही इस मुद्दे पर सरकार को घेरने और सड़क पर उतरने का समय है।
सवाल यह कि विपक्षी नेता कर क्या रहे है?
जरा उसे भी जान लीजिए।
राज्य में मुख्य विपक्षी पार्टी के मुखिया बदलाव यात्रा के तहत भ्रमण कर चुके हैं। मुद्दा क्या बनाए हैं? 1.छत्तीसगढ़िया मुख्यमंत्री को सत्ता से हटाना है।
2.सरकार बनी तो कई अधिकारी जेल में जाएंगे।
3.राज्य के डीसी सत्ताधारी पार्टी के एजेंट की तरह काम कर रहे हैं...आदि. आदि।
विपक्षी पार्टियों में नंबर दो की हैसियत रखने वाले झारखंड विकास मोर्चा के मुखिया बाबू लाल मरांडी जनादेश यात्रा पर हैं। इस यात्रा में वह लोगों से बता रहे हैं कि मौजूदा सरकार पोर-पोर भ्रष्टाचार में डूबी है। अब रह गई कांग्रेस, जो पार्टी के अंदर के कलह से परेशान है।
विपक्षी पार्टियों की ओर से उठाये जा रहे सारे वही घिसे-पिटे मुद्दे हैं जिनके कारण लोकसभा में ये पार्टियां मुंह के बल खा चुकी है। कुछ मुद्दे पिछले विधानसभा चुनाव के भी हैं, जिसमें जनता उन्हें नकार चुुुुकी है। डबल इंजन वाली सत्ताधारी को कुर्सी से बेदखल करने के लिए विपक्षी पार्टियों को कुछ अलग और बेहतर रणनीति के साथ चुनाव मैदान में उतरना होगा। बाद बाकी ख्ववाब देखने का अधिकार हर किसी के पास है।
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| विपक्ष के अनुभवी विधायक हुए भाजपाई |
राज्य में मुख्य विपक्षी पार्टी के मुखिया बदलाव यात्रा के तहत भ्रमण कर चुके हैं। मुद्दा क्या बनाए हैं? 1.छत्तीसगढ़िया मुख्यमंत्री को सत्ता से हटाना है।
2.सरकार बनी तो कई अधिकारी जेल में जाएंगे।
3.राज्य के डीसी सत्ताधारी पार्टी के एजेंट की तरह काम कर रहे हैं...आदि. आदि।
विपक्षी पार्टियों में नंबर दो की हैसियत रखने वाले झारखंड विकास मोर्चा के मुखिया बाबू लाल मरांडी जनादेश यात्रा पर हैं। इस यात्रा में वह लोगों से बता रहे हैं कि मौजूदा सरकार पोर-पोर भ्रष्टाचार में डूबी है। अब रह गई कांग्रेस, जो पार्टी के अंदर के कलह से परेशान है।
विपक्षी पार्टियों की ओर से उठाये जा रहे सारे वही घिसे-पिटे मुद्दे हैं जिनके कारण लोकसभा में ये पार्टियां मुंह के बल खा चुकी है। कुछ मुद्दे पिछले विधानसभा चुनाव के भी हैं, जिसमें जनता उन्हें नकार चुुुुकी है। डबल इंजन वाली सत्ताधारी को कुर्सी से बेदखल करने के लिए विपक्षी पार्टियों को कुछ अलग और बेहतर रणनीति के साथ चुनाव मैदान में उतरना होगा। बाद बाकी ख्ववाब देखने का अधिकार हर किसी के पास है।


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