सख्त हो सरकार
पहले दो अच्छी खबर जान लिजिए। जिला धनबाद कोरोना मुक्त हो गया है। वहां के डीसी के मुताबिक पॉजिटिव पाए गए दो मरीज की रिपोर्ट लगातार दूसरे दिन भी निगेटिव आई है। दूसरी बात ये कि झारखंड तक कोरोना पहुंचाने वाली मलेशियाई महिला भी पूरी तरह निगेटिव होकर रिम्स के चिकित्सकों की निगरानी से दूर पुलिस की हिरासत में चली गई हैं।
अब लौटिए मुद्दे पर। कीबोर्ड पीटने तक रांची में कोरोना हाफ सेंचुरी को लांघ चुका था। कुल संख्य 56 नॉट आउट पर चल रहा था। खाली रविवार को अब तक सर्वाधिक 15 पॉजिटिव मरीज मिले हैं। लगातार तीन सप्ताह तक हॉट स्पॉट का ताज लिए राज करने वाले हिंदपीढ़ी से यह ताज छिन चुका है। कोरोना अब शहर में नेताजी नगर कांटाटोली, बरियातु, लोवाडीह, चुटिया, हरमू तक पांव पसार चुका है।
राज्य में पहली बार ये स्वास्थ्यकर्मी, प्रशासनिक कर्मी और बचाव कार्य में लगे मजदूरों को अपने चपेट में लिया है। सदर अस्पताल, रांची की दो नर्स और एक ओटी सहायक का रिपोर्ट पॉजिटिव आया है। ये तीनों दो दिन से सदर अस्पाल के प्रसूति विभाग में अपनी ड्युटि कर रही थी। हां जांच के लिए सैंपल छह दिन पहले ही जरूर दे दीं थी। ड्युटी के दौरान ये लगभग एक दर्जन से ज्यादा महिला का प्रसव कराई हैं।
इतना के बाद भी लोग नहीं मान रहे हैं। कैसे नहीं मान रहे हैं... उसे इस आकड़े से समझ लिजिए। खाली 24 अप्रैल को रांची में 1046 लोगों का चालान काटा गया है। 24 गाड़ियां सीज की गईं। 35 केस दर्ज किए गए और 43 लोगों को गिरफ्तार किया गया। ये सजा इन्हें सड़क पर तफरीह करने के लिए मिली है। महीना का आंकड़ा देख लिजिएगा तब दांत से जीभ कांट दिजिएगा। यह नंबर तब है जब जरूरी कार्य में लगा स्टीकर चिपका कर कई लोग पुलिस वाले की आंख में धूल झोंक के निकल जा रहे हैं और कुछ पुलिस भी मटिया दे रही है।
एक बात तो तय हो गया है कि अब न लोग मानेंगे और न कोरोना। अगर ये हालात रहें तब रोज कंटेन्मेंट जोन बढ़ते जाएंगे और अधिकारी लाचार होते जाएंगे। अब वह समय आ गया है कि सरकार सख्त कदम उठाए। उठाना ही होगा।
#देहाती _के_नोट्स
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