अदना ही सही ईमानदार रहिए
I Will Take You In Court.. वो पूरी तरह परेशान थे। तब शायद वो ये समझने की अवस्था में भी नहीं रहे होंगे। क्या बोल रहे हैं? किसे बोल रहे हैं? उनके यह बोल भर देने से क्या हो जाएगा?
उन्होंने सोचा होगा अदना सा ही तो है। डर जाएगा। अपनी दिशा को बदल लेगा। हर कोई डर जाता है कोर्ट के नाम से। लेकिन वह डिगा नहीं। उसके पास सवाल थे। वहा जवाब मांगता रहा।
ऐसा पहली मर्तबा नहीं हुआ था। उनके सख्त लहजे से दिमाग में सहसा तीन साल पुराना किस्सा कुलांचे मारने लगा।
किस्सा सेल के शहर का है। साहब झारखंड लोक सेवा आयोग के अधिकारी थे। शहर की नली से लेकर गली और सड़क से लेकर पार्क को चकाचक रखने का जिम्मा उनके माथे था। एकछत्र राज था उनका। एकदम भौकाल टाइट टाइप। जिससे जो चाहे करा लेते थे। शहर के राजा के सचिव वाला जलवा था उनके पास।
कोई उनकी बातों को उनके हिसाब से बस स्वीकार न करे। गजबे भड़कते थे। एक दिन पड़ गए उनके पाले में। जो मन में आया बोलते चले गए। जनाब यहां तक बोल दिए कि पास में होते तब कपार फोड़ देता। सामने वाला बस आहिस्ते से अपने सवाल पर उनका पक्ष लेकर हौले से थैंक यू बोला। मोबाइल के स्क्रीन पर लाल वाला हिस्सा स्पर्श कर की बोर्ड को पीटने में जुट गया।
अगली सुबह पैर पर गिरने के लिए तैयार थे साहब। कह दिए बख्श दो, गलती हो गई। अब आगे से ऐसा नहीं होगा । जी , ऊ शहर के बड़का ऑफिसर थे और सामने वाला एक छोटा सा खबरनवीस। एकदम अदना सा। अदना होने के साथ एक और चीज थी उसके पास ईमानदारी। अदना ही सही बस ईमानदार रहिए।

आई एम प्राउड ऑफ यू भी आता है। अदने और ईमानदार लोगों के हिस्से में...! अंदाज बरकरार रहे दोस्त।
ReplyDeleteशुक्रिया दोस्त।
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