आषाढ़ में हेमंत का आना भगवा पार्टी के कार्तिक को खराब कर सकता है...

हेमंत सोरेन जेल यात्रा से लौट आए हैं। रांची में एक बार फिर से नारा गूंजा... जेल का ताला टूट गया.. हमेंत सोरेन छूट गया। इस नारे की असली टीस कहीं सुनाई दे रही होगी तो वो हरमू रोड स्थित  श्याम प्रसाद मुखर्जी भवन है। 

ये कत्तई नहीं कह रहा कि हेमंत सोरेन को जेल भेजने के पीछे बीजेपी की साजिश थी। लेकिन आज जो हाईकोर्ट ने टिप्पणी की है, इसका सीधा लाभ हेमंत सोरेन को सूबे में 4 महीने बाद होने वाले चुनाव में मिलेगा।  

हाई कोर्ट ने सोरेन को जमानत मंजूर करने के बाद अपनी टिप्पणी में कहा है कि हेमंत सोरेन के मनी लॉन्ड्रिंग केस में शामिल होने के कोई ठोस सबूत नहीं मिले हैं।  वे प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA)एक्ट के तहत जमानत की शर्तों को पूरा करते हैं।  

हेमंत सोरेन ने साफ संदेश दिया है कि उनका परिवार उनके साथ एकजुट है।

जेल जाने का फायदा हेमंत सोरेन की पार्टी को लोकसभा चुनाव में मिला। पार्टी एक सीट से तीन सीट पर पहुंच गई। अब बाहर आने का फायदा विधानसभा चुनाव में मिलना तय है। हेमंत सोरेन के जेल में रहने के दौरान इनके राह की जितनी मुश्किलें थीं उसका समाधान पहले ही हो चुका है।    

झारखंड के सीएम रहते जब हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी हुई थी तो सभी इस बात की चर्चा करने लगे थे कि तीन दशक बाद झारखंड में बिहार की हिस्ट्री दोहराई जाएगी। झारखंड को नई राबड़ी देवी मिलेगी। 

ऐसा कुछ नहीं हुआ, लेकिन वो सब हुआ जो हेमंत चाहते थे। इनकी पत्नी कल्पना सोरेन राज्य की सियासत का नया चेहराा बनीं। पार्टी की बुलंद आवाज और सियासत की वो कितनी माहिर खिलाड़ी साबित होने वाली हैं इसका नमूना  वो गांडेय उपचुनाव जीत कर और लोकसभा चुनाव को अपने दम पर लड़कर वो साबित कर दी हैं।

पार्टी में हेमंत की बैरियर और भावनात्मक रुकावट उनकी पत्नी सीता सोरेन पार्टी छोड़कर जा चुकी हैं। जिस तरह का आरोप वो परिवार पर लगा चुकी हैं परिवार अब उससे उबर चुका है। तय है कि काठ की हांडी अब दोबारा से विधानसभा चुनाव में नहीं चढ़ेगा। लोकसभा चुनाव वे पहले ही हार चुकी हैं। छोटे भाई पहले ही हेमंत सोरेन के साथ हो लिए हैं।  

चंपाई सोरेन को सीएम बनाना हेमंत सोरेन का मास्टर स्ट्रोक था। इसके साथ उन्होंने पार्टी के नाराज पुराने सिपाही की नाराजगी तो दूर किए ही हैं कोल्हान में अपनी जमीन में डीएपी से ज्यादा ताकतवर खाद डाल दिए हैं। इन्हें सीएम बनाकर लगभग 27 फीसदी से ज्यादा आबादी वाले राज्य के आदिवासी वोटर्स को वे अपने पक्ष में करने में कामयाब हुए हैं।  

अब जब वे जेल से बाहर हैं जेल जाने और जेल से बाहर निकलने, इस दौरान की यातनाओं को तो बताएंगे ही भावनात्मक सपोर्ट के लिए वे सीधे तौर पर आदिवासी कार्ड खेलेंगे। जेल से बाहर आने के बाद उन्होंन इस तरफ इशारा भी कर दिया है। आदिवासी सीएम को सत्ता से बेदखल करने के षडयंत्र के उनके कैंपेन को कमजोर करने के लिए भाजपा को मजबूत तर्क निकालना होगा। 

भ्रष्टाचार के नाम पर वो लोकसभा चुनाव में मुंह की खा चुकी है। गुटों में बंटी झारखंड भाजपा पहले ही परेशान है, ऐसे में  हेमंत सोरेन को जमानत उनके कोढ़ में खाज साबित हो सकता है।  ये तय है कि आषाढ़ में हेमंत का आना भगवा पार्टी के कार्तिक को खराब कर सकता है।  



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