एक खत केजरीवाल के नाम


डियर केजरीवाल सर,
एक बार फिर एक जूता आपकी ओर बड़ी आसानी से उछाल दिया गया। जैसा कि वीडियो में दिख रहा है वेद प्रकाश नाम का बिलकुल ही एक सामान्य सा लड़का बड़ी सहजता के साथ पहले तो आपकी बातों को सुन रहा था। न जाने अचानक उसे क्या हुआ कि उसने अपना जूता उतार कर आपकी तरफ उछाल दिया। हालांकि मंच पर आसीन आपके सहयोगीगण इस बार कुछ ज्यादा ही सतर्क थे। जूता आप तक पहुंचने से पहले उन्होंने इसे कैच कर लिया।

लेकिन सर मेरे मन में काफी दिनों से एक सवाल कौंध रहा है कि आखिर आप में ऐसा क्या है कि सबसे ज्यादा जूते आपको ही पड़ते हैं। दूसरी तरफ दिल्ली की गलियों में लगे बैनर, पोस्टर और नेशनल न्यूज चैनल के साथ-साथ एफएम चैनलों पर दिखने वाले ऐड पर नजर दौड़ाएं तो ज्ञात होता है कि आप तो दिल्लीवासियों के हित के लिए बड़ी तेजी से काम कर रहे हैं। इसके बाद भी लोगों में आपके प्रति इतना गुस्सा क्यों है?

आप कह सकते हैं कि अन्य मुख्यमंत्रियों की तरह आप जेड प्लस सुक्योरिटी नहीं रखते हैं। इसलिए लोगों की पहुंच आसानी से आप तक हो जाती है। सर इस पर आपसे मेरा अगला सवाल यह होगा कि आपको ऐसा करने से किसने रोका है? सिक्योरिटी रख लेने से आप जनता की नजरों में करप्ट नहीं हो जाएंगे। न ही जनता के दिलों में आपके प्रति प्यार कम हो जाएगा। और न ही ये सिक्योरिटी आपको जनता के करीब जाने से रोकेगी। हां एक चीज जरूर हो जाएगा कि आपके पास दिल्ली पुलिस को कोसने के बहाने कम हो जाएंगे। संभव हो कि आपकी ओर ओर उछलने वाले जूते और स्याही में कमी आ जाए।
 
मुझे नहीं मालूम आपको पता है या नहीं कि जूते खाने वाले सीएम की लिस्ट में आप टॉप पर पहुंच गए हैं। दिलचस्प बात यह कि सर आप को घूंसा, जूता, चांटा या फिर स्याही फेंकने वाले किसी पार्टी के नहीं हैं। यह सभी एक आम आदमी हैं आपकी तरह, हमारी तरह। हर किसी को आपके किसी न किसी फैसले से नाराजगी है।

अब देखिए न नवंबर 2013 में आप पर स्याही फेंकने वाले शख्स ने तो खुद को अन्ना सपोर्टर बताया था। जिस अन्ना को आप भी अपना गुरु मानते हैं। अब दावे के साथ तो नहीं कह सकता हूं कि अन्ना के साथ वह कितने दिनों तक वह भूख हड़ताल पर बैठा होगा। लेकिन आप के साथ इस प्रथा की शुरुआत करने वाला शख्स शायद वही था।
इसी तरह मार्च 2014 में जब आप मोदी जी से मुकाबला करने के लिए बनारस पहुंचे थे तो वहां भी आपका स्वागत अंडे और स्याही से किया गया था। हालांकि उन लोगों की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है कि वह किसी पार्टी से थें। लेकिन आप तो यही कहेंगे न कि देखिए जी यह सब कुछ मोदी जी का किया-धरा है। भले ही वह कोई हों।


चलिए बनारस में तो आप मोदी जी पर आरोप गढ़ने सफल हो गए थे। लेकिन इसके ठीक एक महीने बाद जब दिल्ली के दक्षिणपुरी में आप वोट मांग रहे थे तो आपके पीछे से एक शख्स ने आप पर जोरदार हमला किया था। खैर इस दौरान आपको कुछ खास नुकसान नहीं पहुंचा था। लेकिन इसके ठीक चार दिन बाद सुल्तानपुरी में आपकी बाएं गाल पर एक ऑटो ड्राइवर ने झन्नाटेदर झापड़ रसीद दिया था। टेलिविजन पर आपका चेहरा सूजा देख कर काफी दुख हुआ था। हालांकि बाद में आपसे मिलने के बाद उसने अपनी इस गलती के लिए आपसे माफी भी मांग लिया था।

अब ऑड-ईवन के कारण आप पर फेंकी गई स्याही और जूते वाली घटना को ही ले लीजिए न सर। भावना अरोड़ा और वेद प्रकाश की तो आपसे किसी प्रकार की कोई दुश्मनी नहीं है। दोनों एक ही बात कह रहें है कि सीएनजी स्टिकर को बांटने में धांधली हो रही है। बस इस छोटी सी वजह से ये लोेग आपके रंग में भंग कर रहे हैं।

सर मैं दिल्ली का नहीं हूं और न ही आपसे कभी मिला हूं। लेकिन बुरा लगता है जब आप पर स्याही और जूता फेंकने की खबर टीवी चैनल पर देखता हूं। अगले दिन जब बोल्ड अक्षर में न्यूज पेपर मे पढ़ता हूं कि दिल्ली के सीएम पर फिर फेंका गया जूता।

मुझे नहीं मालूम सर आप किस प्रकार की राजनीति कर रहे हैं। लेकिन बंगाल की सीएम ममता बनर्जी भी आप ही की तरह सामान्य जीवन जीती हैं। रक्षा मंत्री बनने से पहले मनोहर पर्रिकर भी आप ही एक तरह एक सामान्य जिंदगी जीने वाले मुख्यमंत्री थे। दोनों अपने-अपने राज्यों में विकास के बेहतर काम भी किए हैं। लेकिन जहां तक मैं जानता हूं शायद ही दोनों पर कभी स्याही या जूते फेंके गए हो। सर अच्छी बात है जनता के हित में काम करना और एक सामान्य जिंदगी जीना। लेकिन एक सीएम के रूप में यह भी जरूरी है कि आप अपने सुरक्षा का ख्याल रखें। न कि आप हर बार हर मसले पर राजनीति ही करें। पहले सुरक्षा लेने से मना करें फिर स्याही फेंके जाने पर मोदी जी और दिल्ली पुलिस को जम कर कोसें।
आपका एक शुभचिंतक
शंभू नाथ

    

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