कुछ तो बात थी उसकी आवाज में

शनिवार का दिन था और घड़ी की सुइयां रात के 9 बजने का इशारा कर रही थी। लैपटॉप के की-बोर्ड पर अपनी उंगलियों से मैं कुछ शरारत कर रहा था। कुछ लिखना चाह रहा था लेकिन बात नहीं बन पा रही थी। हलांकि जिस विषय पर लिखने की सोंच रहा था उस पर पूरे दिन अच्छा खासा रिसर्च किया था। अचानक दिल में ख्याल आया चलो अपनी एक दोस्त से बात कर लेता हूं। शायद उससे बात करने के बाद कुछ बेहतर लिख सकूं। फोन उठाया और बेझिझक उसका नंबर मिला दिया।

फोन के 10-12 बार रिंग के बाद उधर से एक प्यारी सी आवाज आई ‘हैलो’। आवाज कुछ बदली-बदली सी लगी। मुझे लगा कहीं मैं गलत जगह तो फोन नहीं मिला दिया। संदेह मिटाने के लिए मैंनें एक बार फिर कहा 'हैलो'। उधर से आवाज आई कौन बोल रहे हैं? आवाज में इतनी मधुरता थी कि एक पल को मैं उसकी मिठास में खो गया। चंद सेकेंड बाद उससे तब बाहर आया जब उधर से आवाज आई 'हैलो'...
मैंने कहा, मैं भूत बोल रहा हूं। मुझे लगा कि वह मुझसे शरारात कर रही है।
अच्छा तो भूत भी बोलते हैं। बिना किसी बिलंब के उधर से जवाब आया।
कभी-कभी बोल लेते हैं। मैंने कहा।
अब स्पष्ट हो गया था कि यह वो नहीं जिसे मैंने फोन किया है।
मैंने बड़ी विनम्रता से पूछा क्या मेरी बात मेरे दोस्त से हो जाएगी? 
वह अभी यहां नहीं है नीचे गई है।
कब तक आ जाएगी?
तो जवाब आया जव वॉर्डन उसे छोड़ देगी।
कितनी देर में छोड़ेगी?
मुझे क्या पता? जब वॉर्डन से उसकी बातें पूरी हो जाएगी।  हां जब वो आएगी तो मैं उसे बोल दूंगी, वह आपसे बात कर लेगी।
आप कौन बोल रहे हैं? मैंने पूछा
मैं चुड़ैल बोल रही हूं? जवाब मिला
वाव चुड़ैल भी बोलती है।
क्यों नहीं बोल सकती जब भूत बोल सकते हैं तो चुड़ैल क्यों नहीं ?
तुम्हें पता है मैं चुड़ैल से पहली दफा बात कर रहा हूं, मुझे चुड़ैल से काफी डर लगता है।
अच्छी बात है डरना भी चाहिए देख लीजिएगा कहीं, आज रात में आकर आपको परेशान न करे। उसने कहा।
भला मैंने उसका क्या बिगाड़ा है जो वह मुझे तंग करेगी।
       इससे पहले मैंने कभी किसी अंजान लड़की के साथ इतनी बेबाकी से बात नहीं किया था। अंजान तो छोड़िए अपनी पहचान वाली लड़कियों से भी मैं बिलकुल ही दायरे में रह कर बातें करना पसंद करता हूं। लेकिन न जाने क्यों इस बेनाम, अनदेखी और अंजान आवाज से मैं 12 मिनट तक बातें करते रहा। उसकी आवाज में एक अलग किस्म का विश्वास (जिसे उसने अंग्रेजी में कॉन्फिडेंस और हिंदी में आत्मविश्वास बताया) था। उसकी आवाज रॉबीली थी। एकदम खनकदार। हां आवाज में थोड़ा भारीपन भी था। अब यह जुकाम के कारण था या नैचुरल मुझे नहीं मालूम।

इन 12 मिनटों में कई दफा वह मुझ पर रॉब भी झाड़ने का प्रयास की। जब मैंने उससे कहा कि किसी दूसरे का फोन ऐसे नहीं उठाया करते। वह अपनी आवाज को तेज करते हुए बोली,
''हलो यह मेरे दोस्त का फोन है और मुझे पूरा अधिकार है अपने दोस्त के कॉल को रीसिव करने का। आप कौन होते हैं ऐसा बोलने वाले’’ ।

कई बार उसकी बातों को सुनकर मुझे काफी तेज हंसी आ रही थी। हालांकि अंत तक मैं खुद को रोक नहीं पाया और उसके सामने ही ठहाके मार कर हंसने लगा।

अभी भी नहीं जानता हूं वह कौन थी, कहां की थी, क्या करती है? वगैरह-वगैरह सिवाय इसके कि वह मेरे एक दोस्त के साथ रहती है जो कि अभी हाल में अपना इंजीनियरिंग का कोर्स कंप्लीट की है। कुछ और लिखने की प्लानिंग कर रहा था लेकिन उससे बात करने के बाद उसकी इन यादों को यूं जाया करने की जगह मैंने उसे यहां संजो लिया और बस यही लिख पाया।




Comments

Popular posts from this blog

मुख्यमंत्री जी, मोरहाबादी की खूबसूरती पर यूं दाग न लगने दीजिए...

रुचि

गुरविंदर कौर