झारखंड में बीजेपी को रीचार्ज कर पाएगी ये लाठी!
रांची में आज खूब लाठियां भांजी गईं।आंसू गैस के गोले दागे गए। नेता-कार्यकर्ता दौड़ाए गए। लोग भींगा-भीगा कर पीटे गए। जवाब में पुलिस वालों पर पत्थर और बोतलें फेंकीं गईं। ये सब हो रहा था राज्य के राजपथ पर। मौका था बीजेपी के सचिवालय घेराव रैली की। प्रथम दृष्ट्या रैली का हासिल रहा कराहते नेता, कार्यकर्ता, पुलिस और पत्रकार।
ये सब अचानक हो गया है। ऐसा बिलकुल नहीं है। आंदोलन के अगुआ और बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने इस स्थिति की आशंका एक दिन पहले ही जता दी थी। यानी मामला बिगड़ने का ग्राउंड एक दिन पहले ही तय हो गया था। सबको पता था इस रैली में खाली बीजेपी के सांसद और विधायक नहीं रहेंगे। इसमें रघुवर दास और बाबू लाल मरांडी जैसे वे दिग्गज चेहरे भी शामिल होंगे जिनके पास सरकार चलाने के भरपूर अनुभव हैं।
विपक्ष हावी जाए सरकारें कहां इसे आसानी से स्वीकार कर पाती है। मामले को बड़ा बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ा गया। पहले भाजपा की ओर से आयोजित रैली स्थल में धारा 144 लगाया गया। इसके बाद रैली के दिन ही राज्य भर में गहन वाहन चेकिंग अभियान चलाया गया। रैली स्थल पर हजारों की संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई। शहर भर में बैरिकेडिंग की गई। इसे पुख्ता तैयारी के नजरिए से भी देखा जा सकता है।
भाजपा यही तो चाहती थी सरकार। विपक्ष में आने के बाद संघर्ष के नाम पर कुल जमा पूंजी विधानसभा तक पदयात्रा और प्रखंड जिला में धरना-प्रदर्शन था। बाकी कागजी शेर और जुबानी खर्च किए गए। जब भी संघर्ष की बात आती थी पार्टी पिछड़ जा रही थी। ऐसे में पार्टी को जमीन पर जिंदा करने के लिए आलाकमान ने पहले संगठन के माहिर लक्ष्मीकांत बाजपेयी को झारखंड की कमान दी। असर ये हुआ कि उनकी अगुआई में पार्टी पहले ही प्रदर्शन में जमीन पर मजबूत दिखी।
ये पॉलिटिक्स है साहब। यहां तो वर्षों तक मुर्दे जिंदा रखे जाते हैं। इस लाठीचार्ज को बीजेपी चुनाव तक कहां आसानी से छोड़ने वाली है। राज्य में सत्तावापसी के मिशन में जुटी भाजपा कार्यकर्ताओं को ये घटना न केवल एकजुट करेगी बल्कि आगे के संघर्ष के लिए उत्साहवर्धक भी साबित हो सकती है।




Comments
Post a Comment