अचानक ये आक्रोश
25 अगस्त पटना के अटल पथ पर नाराज लोगों ने 2.5 घंटे तक तांडव किया
- राह चलती महिलाओं से छेड़छाड़ किया
- लोगों की गाड़ियां जला दी
- पुलिस पर हमले हुए
- मंत्रीजी किसी तरह जान बचाकर भागे
27 अगस्त को नालंदा के हिलसा में ग्रामीण विकास मंत्री पर हमला
- सड़क दुर्घटना में 9 लोगों की मौत के बाद मातमपुर्सी में गए थे
- ग्रामीणों ने कहा, थोड़ी देर रुक जाइए, नहीं रुके तो ग्रामीणों ने हमला कर दिया
- मंत्री जी सिक्योरिटी के बीच जान बचाकर भागे।
27 अगस्त को ही अब एक घटना पटना के गर्दनीबाग में ही घटी है। यहां 5 साल की एक बच्ची सुसाइड करने की कोशिश की है।
स्कूल के एक बंद बाथरुम में आग लगाकर जान देने की कोशिश की। इसके बाद आसपास के सैकड़ों लोग स्कूल में जुटे और हंगामा करने लगे।
ग्रामीणों ने पुलिस पर हमला किया, स्कूल में तोड़-फोड़ की। जमकर उत्पात मचाया।
अचानक से आक्रोश वाला मामला बिलकुल नया मालूम पड़ रहा है। घटनाएं पहले भी हो रहीं थीं, लेकिन इस तरह का आक्रोश बहुत नेग्लिजिबल अमाउंट में दिख रहा था। अब अचानक पुलिस पर हमला। आम राहगीर पर हमला। मंत्री पर हमला, गाड़ियों को फूंक देना। पटना के भीतर 3 साल में इस तरह की घटना नहीं के बराबर ही देखा हूं। बिहार के कुछ सुदूर इलाके में शराब की जांच के दौरान पुलिस पर हमला की खबर आती थी लेकिन ये ट्रेंड एकदम नया है।
हालांकि अटल पथ पर हुए बबाल में गहरी साजिश रची गई थी। एसएसपी की जांच में भी ये बात सामने आई है। अगर साजिश इतनी खतरनाक है तो पुलिस को भी सख्त ऐक्शन लेना होगा। पटना में अगह 2500 रुपए में किराए पर उपद्रवी बुलाकर घटना को अंजाम दे दिया जा रहा है तो ये गोपाल खेमका मर्डर से ज्यादा खतरनाक ट्रेंड है।
अभी तक कॉन्ट्रैक्ट किलर लोगों की परेशानी का सबब था। अब ये भाड़े वाले उपद्रवी बेहद ही गंभी ट्रेंड है। इस पर जल्दी शिकंजा नहीं कसा गया तो सोसाइटी के लिए जहर साबित हो सकता है।
हालांकि यहां सज्जन ये भी कहते सुने जा रहे हैं कि जनता का अब सरकार पर से इकबाल खत्म हो गया है, लोगों का भरोसा खत्म हो रहा है, इसलिए इस तरह क घटनाएं ज्यादा बढ़ रहीं हैं। चुनाव है तो इस तरह की चर्चाएं होंगी ही। लेकिन मेरा मानना है कि ये सीधे तौर पर लॉ एंड ऑर्डर का मामला है और पुलिस को जल्द और बड़े एक्शन लेने की दरकार है।
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