राहुल की राह निहार रहा बरबीघा का कांग्रेस आश्रम
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव दोनों आज बरबीघा में थे। वोटर अधिकार यात्रा के कार्यक्रम के तहत दोनों को आज बरबीघा के ऐतिहासिक SKR कॉलेज ग्राउंड में रात बिताना था।
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| ये बरबीघा का प्रखंड कांग्रेस मुख्यालय है। आज इसके सबसे बड़े नेता यहां आए हैं और ये पूरी तरह वीरान है। कभी जिले भरे के नेता यहां से रणनीति बनाया करते थे। (फोटो साभार- अरुण साथी जी के वॉल से) |
बरबीघा में कांग्रेस से जुड़े कार्यकर्ताओं के लिए इससे बड़ा दिन नहीं हो सकता। इस यात्रा का रुट तय करने वाले नेताओं को इस बात का शुकराना तो पहुंचना ही चाहिए। उन्होंने बड़ी काबिलियत रुट को निर्धारित किया है।
बरबीघा में राहुल गांधी के रुकने से क्या होग? जनता क्या कहती है, उसे जानने से पहले बरबीघा विधानसभा को कांग्रेस के नजरिए से समझिए-
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| बरबीघा का श्रीकृष्ण सिंह चौक अभी ट्रैफिक के लिहाज से लाइफ लाइन है। मेरी याद में यहां पहली बार राष्ट्रीय स्तर के नेताओं की सभा हुई। वो भी बीच सड़क पर। जितनी देर तक सभा हुई ट्रैफिक को रोक दिया गया। |
- आजादी के बाद 1952 में हुए चुनाव में सबसे पहले कृष्ण मोहन प्यारे सिंह कांग्रेस के टिकट पर यहां से विधायक बने थे।
- 1957 में श्रीकृष्ण सिन्हा जी, वही श्री बाबू जिन्हें बिहार के निर्माता और बिहार केसरी की उपाधी दी गई उन्होंने यहां से कांग्रेस का झंडा बुलंद किया।
- शिवशंकर सिंह यहां से दो बार विधायक बने 1967 से कांग्रेस के टिकट पर और 1969 में निर्दलीय
- शेखपुरा जिले के निर्माण का श्रेय जिन्हें दिया जाता है, ऐसे दिग्गज कांग्रेसी राजो बाबू भी विधायक यहीं से बने थे। हालांकि रिकॉर्ड के मुताबिक 1972 में वे यहां से निर्दलीय चुनाव जीते थे।
- इसके बाद लगातार 15 साल तक 1980 से लेकर 1995 महावीर कांग्रेस के टिकट पर यहां से चुनाव जीतते रहे।
- 2000 और 2005 के फरवरी का चुनाव महावीर चौधरी के बेटे और मौजूदा नीतीश कैबिनेट का बड़ा चेहरा अशोक चौधरी यहां से कांग्रेस के टिकट पर ही अपनी एक्टिव पॉलिटिक्स की शुरुआत की।
- 2015 में जब देश मोदीमय था तो बरीघा में सुदर्शन कुमार कांग्रेस के टिकट से जीतने में सफल रहे
अब इसे ऐसे समझिए कि 1952 से लेकर 2020 तक बिहार में कुल 17 विधानसभा के चुनाव हुए, इसमें 10 बार और राजो बाबू को जोड़ लें तो 11 चुनाव में कांग्रेस की जीत हुई। यानी बरबीघा का एक मजबूत विश्वास कांग्रेस पर रहा है।
आज भी बरबीघा में आपको ऐसे समर्पित कांग्रेसी मिल जाएंगे जो बिना किसी लोभ के अपने शरीर का कतरा-कतरा पार्टी पर न्योछावर करने के लिए समर्पित हो जाएंगे। बदले में पार्टी से केवल नाउम्मीदी ही मिली।
खंडहर में तब्दील होती कांग्रेस के प्रखंड कार्यालय और श्री कृष्ण सिंह आश्रम को इस बार आस जगी थी कि रंग का कुछ पोचाड़ा तो उस पर चल ही जाएगा। कुछ समर्पित कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस दफ्तर में जंगलनुमा घास को साफ कराया था तो उम्मीद जगी थी कि भोजन के लिए ही सही सामियाना तो वहां लग ही जाएगा।
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| ये बरबीघा का ऐतिहासिक एसकेआर कॉलेज ग्राउंड हैं। यहां देश के दिग्गज की सभाएं होती हैं। आज यहां राहुल गांधी रात्रि विश्राम करेंगे। |
कांग्रेसी और कांग्रेस कार्यालय को हर बार की तरह इस बार भी नाउम्मीदी ही हाथ लगी। पार्टी के माननीय नेता अपनी विरासत छोड़ जर्मन हैंगर से बने टेंट सिटी में रात बिताना मुनासिब समझे। खैर, सुबह भर का वक्त है काश उन दीवारों को नेता झांक आए।
आखिर में बात एक पब्लिक की। एक पुराने कांग्रेसी से मैंने पूछा- आपके नेता आ रहे हैं कुछ बदलेगा। उन्होंने कहा- देख नहीं रहे हैं, आखिरी बार बरबीघा की सड़कों पर कांग्रेस का इतना झंडा पताका, और तोरण द्वार कब दिखा था। बस इतना ही बदलेगा। बूथ पर तो पिछली बार भी हम 100 वोट से पिछड़ ही गए थे।
अब मेरा अपना एक पर्सनल सुझाव- रैली बिहार मोड़(श्रीकृष्ण सिंह) चौक की जगह श्रीकृष्ण आश्रम में भी किया जा सकता था।



शानदार
ReplyDeleteअच्छी जानकारी
Deleteबहुत-बहुत शुक्रिया। हौसला बढ़ाते रहिएगा...
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