इस 'जहर' की कीमत तुम क्या जानो…



आज  दफ्तर के लिए निकलने से चंद मिनट पहले बस यूं ही टीवी ऑन कर दिया और बिलकुल नया वाला न्यूज चैनल “इंडिया टुडे” लगा दिया। चैनल स्विच करते ही अपने चिरपरिचत अंदाज में लालू जी स्क्रिन पर दिख गये। यहां श्रीमान लालू यादव का साक्षात्कर चल रहा था। राजदीप सरदेसाई बार-बार उनसे एक ही सवाल का जवाब  अलग-अलग तरीके से जानने का प्रयास कर रहे थे। लेकिन उनके सवाल पूछने का अंदाज-ए-बयां और लालूजी का जवाब इतना दिलचस्प था कि न चाहते हुए भी मेरे नैन उसे देखने को ठहर ही गए।
    राजदीप सरदेसाई हर बार उनसे यही जानने का प्रयास कर रहे थे कि लालू जी आखिर आपने यह ‘जहर’ पिया क्यों? मोदी को रोकने के लिए, या नीतीश को नेता चुनने के लिए? श्रीमान लालू जी बार-बार सोफे पर आगे-पीछे होकर एक ही रटा रटाया जवाब दे रहे थे, “हम बिहार में सांप्रदायिक ताकतों को दाखिल होने से रोकना चाहते हैं, साथ ही उनकी यहां से घर वापसी भी कराएंगे”।आखिर में तो वे इसे अपना जन्मसिद्ध अधिकार ही घोषित कर दिय।
    श्रीमान लालू जी आप लाख छुपा लो, लेकिन ये पब्लिक है सब जानती है। हलांकि श्री सुशाषन बाबू तो आपके साथ विलय के बहाने अपने एकाधिकार की पूरी प्लानिंग कर ही लिये थे लेकिन, आप भी आखिरी पल में दिखा दिये की आप भले चुनाव नहीं लड़ सकते लेकिन इसमें महारत तो आपको हासिल हय्ये है न।
   सबसे बड़ी बात तो ये कि आपके पास कोई दूसरा रास्ता भी तो नहीं था अमृत पाने का ।माननीया राबड़ी देवी तो अब चुनाव जीतने से रही, आपने डॉ. मीसा पर दांव लगाया, जो अपने डेब्यु में ही खुद के चाचा से बुरी तरह मात खा गई और ये आप भी भलीभांती जानते हैं कि आपके सहाबजादे इसके कितने काबिल हैं।
भले सुशासन बाबू आपके चेले ठहरे, और चेले को नेता मानना आपके लिए जहर पीने के समान है लेकिन विकास पुरुष नामक एक छवि तो इन्होंन भी अपनी बना ही ली है न। साथ ही इ मत भुलिये कि ये सुशाषन बाबू भी हैं।
   सबसे दिलचस्प तो यह देखना होगा क्या जातिगत राजनीति के लिए प्रसिद्ध बिहार में 14 फीसदी वाले 4 फीसदी वाले को अपना नेता चुनते हैं? क्या अपने नेता की तरह ये भी जहर पीना पसंद करेंगे,या फिर इस गर्मी में वो अपना मट्ठा पी कर ही मस्त रहना चाहेंगे।                       


Comments

Popular posts from this blog

मुख्यमंत्री जी, मोरहाबादी की खूबसूरती पर यूं दाग न लगने दीजिए...

रुचि

गुरविंदर कौर