मरीज हैं गुनहगार नहीं
कोरोना उग्र हो चुका है। सरकार माने न माने झारखंड में इसका विस्तार सामुदायिक स्तर पर हो गया है। हम सबको इसके बीच जीने की आदत डालनी होगी। हर उस जरूरी मापदंड का पालन करना होगा जिससे हम इससे सुरक्षित रह सकें। जान और जहान दोनों हमारे लिए जरूरी है। अपना ख्याल अगर आप खुद नहीं रखिएगा तो ये व्यवस्था समाज की नजरों में आपको गुनहगार साबित कर देगी। इसकी एक बानगी आज की एक घटना से समझिए।
मेरे मोहल्ले की सुबह सावन के फुहारों से शुरू हुई। गीली सड़कें और उस पर सन्नाटा। बीते दिनों की तरह ही कुछ महिलाएं घर से दूध लाने, सब्जी लाने घर से बेधड़क निकल रहीं थी। गली में पानी वाला भी आया और दूध वाला भी। अब तक किसी को इस बात का इल्म नहीं था इस मोहल्ले के शुरुआती मकान में एक शख्स कोरोना संक्रमित पाया गया है।
सुबह की ठंडी हवा में धीरे-धीरे ये खबर आग की तरह फैलने लगी। लोगों के यकीन को पक्का कर दिया निगम की उस गाड़ी ने जिसने अपनी टंकी का पूरा केमिकल उस संक्रमित घर के आगे उड़ेल दिया। सेनेटाइजेशन की इस प्रक्रिया को देखने के लिए पूरा मोहल्ला अपने-अपने छतों पर या बालकनी में था।
यह प्रक्रिया पिछले दो महीने से सप्ताह मेएक बार रोज हो रही है लेकिन किसी ने किसी को नहीं कोसा, लेकिन अब छतों पर लोग उस शख्स को अलग-अलग ताने देने लग गए थे। यह मामला मोहल्ले में मसाला का रूप ले लिया था। हर कोई अपने हिसाब से इसकी व्याख्या कर रहा था।
उस घर के आगे कोई भी गाड़ी रूक रही थी तो लोग अपनी आंखें वहां गड़ा दे रहे थे। गलबातों का सिलसिला अभी चलता रहा और सुबह बीत गई। दोपहर हुआ। पहले मजिस्ट्रेट की एक गाड़ी आई और मुहल्ले का मुआयना कर के चली गई।
दोपहर के ठीक 12 बजे सफेद रंग का एक एंबुलेंस उनके दरवाजे पर आकर रुका। आया तो वो शांति से था लेकिन जाते वक्त अपने हूटर की आवाजा को हाई पर रखा था। मरीज किसी प्रकार से सीरियस नहीं था। स्वास्थ्य विभाग को संक्रमण का पता रात के 11 बजे से पहले चल गया था। दिन के 12 बजे बाद वह संक्रमित व्यक्ति को लेकर जा रहा था। गली की सड़क पर कहीं कोई जाम नहीं था।
इसके बाद भी हूटर क्यों, क्या स्वास्थ्य विभाग पूरे मोहल्ले को बताना चाहता है कि उनके मोहल्ले से वह एक मरीज को ले जा रहा है। माफ कीजिएगा। वह अन्य गंभीर बीमारियों के मरीज की तरह ही एक बीमार है, गुनहगार नहीं। वह अस्पताल जा रहा है जेल नहीं।
नोट- कोरोना का खौफ तीन महीने में पहली बार आज अपने मोहल्ले के लोगों में महसूस किया। लॉकडाउन में भी मेरा मोहल्ला गुलजार रहा था। मोहल्ले में सुरक्षा के हर पैमाने का पालन पहले दिन से किया जा रहा था।
Comments
Post a Comment