एक जरूरी सूचना


24 अप्रैल को मैंने एक पोस्ट लिखा था। इसमें रांची को संभलने की ताकीद किया था । कहा था, स्थिति बिगड़ी तो इस शहर को संभालना मुश्किल हो जाएगा। जिसका डर था। उसके हालात बन गए हैं। यह पोस्ट डराने के लिए बिलकुल नहीं है। बल्कि कुछ सच्चाइयां बताने के लिए हैं।

राजधानी के मौजूदा हालात को इस उदाहरण से समझिए। रांची के एक मोहल्ले में एक परिवार के सभी सदस्यों की कोविड रिपोर्ट पॉजिटिव आई। उसमें बुजुर्ग माता-पिता से लेकर बच्ची समेत आठ सदस्य शामिल हैं। रिपोर्ट की जानकारी जिला प्रशासन को मंगलवार (14 जुलाई) सुबह 11 बजे तक मिल गई थी। बुधवार (15 जुलाई) दोपहर 2 बजे तक उनमें से किसी को कोविड अस्पताल नहीं ले जाया जा सका था। इस बात की जानकारी होते हुए भी कि संक्रमित बूढी मां की स्थिति क्रिटिकल है। उन्हें सांस लेने में परेशानी है।

ये हालात उस शख्स के परिजन की है जिनकी पहुंच जिला प्रशासन के लेकर सीएमओ तक है। वह पूरे दिन परेशान रहे लेकिन उनके परिजनों को न तो कोई ये बताने वाला था कि किस प्रकार की दवा लेनी है और न ही कोई उनकी खबर लेने वाला था।

ये हालात क्यों हैं? अब जरा इसे समझ लिजिए। राजधानी रांची में अभी तक तीन कोविड अस्पताल थे जहां संक्रमित को भर्ती कराया जा रहा है। रिम्स (100 बेड), सीसीएल गांधीनगर (60 बेड) और पारस अस्पताल (50 बेड)। रिम्स व सीसीएल गांधी नगर का प्रबंधन अब मरीज कोरोना के मरीज को भर्ती करने से हाथ खड़ा कर दिया है। पारस अस्पताल खाली जरूर है, लेकिन अगर वहां इलाज शुरू हुआ तो खर्च में इजाफा हो सकता है।

सरकार की ओर से रिसालदार बाबा, डोरंडा में 60 बेड का कोविड अस्पताल बनाया गया है। एक और अस्पताल को कोविड अस्पताल में बनाने की तैयारी लगभग पूरी कर ली गई है। लेकिन वहां की सुविधा भगवान भरोसे ही है। वहां एडमिट किए गए मरीजों को खाना तक समय से नहीं मिल पा रहा है।

इसके अलावा जिला प्रशासन ने निजी अस्पतालों को तैयार रहने का निर्देश दे चुका है। लेकिन निजी अस्पताल संचालक अभी तक इस पर अपनी पूरी सहमति नहीं दिए हैं। अगर देते भी हैं तो शहर में कोविड के अलावा अन्य बीमारियों के लिए स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमरा जाएगी। कोविड का इलाज 10 गुणा से ज्यादा महंगा होगा सो अलग। 

व्यवस्था से इतर संक्रमण की रफ्तार पर नजर दौ़ड़ाइएगा तो यह राष्ट्र और राज्य दोनों से तेज है। रांची में अब 13 दिन से भी कम समय में कोरोना के मरीज दोगुने हो जा रहे हैं। देश में यह रफ्तार 21दिन और झारखंड में 15 दिन है। रोजाना मिलने वाले मरीजों की संख्या अब 50 को लांघ गया है।

कुल मिलाकर आपके पास अस्पताल और डॉक्टर का अभाव है। तकनीशियन भी पर्याप्त मात्रा में नहीं है। संसाधन कम होने की बात तो मुख्यमंत्री शुरू से ही कर रहे हैं। बस एक चीज है जो आप कर सकते हैं। घर में रहिए। योग को नियमित रूटीन में शामिल कीजिए। इम्यूनिटी को बेहतर बनाने वाला खाना खाइए। काम के लिए अगर घर से निकल रहे हैं तो सरकार के बताए हर दिशा-निर्देश का पालन करें। बाकी ये आपका शहर है। मेरे से बेहतर यहां के हालात को आप जानते हैं।

सूचना समाप्त 

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